
लोलारक कुंड
वाराणसी. धर्म नगरी काशी के लिए कहा गया है सात वार नौ त्योहार। यहां एक नहीं अनेक ऐसा स्थान हैं जहां लोग अलग-अलग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भिन्न-भिन्न तिथि पर जुटते हैं। इन्हीं में से एक है लोलारक कुंड जिसे सूर्य सरोवर की भी मान्यता प्राप्त है। इस सरोवर में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को लगती है श्रद्धालओं की भारी भीड़। मान्यता है कि इस कुंड में पति-पत्नी दोनों के साथ स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है।
ऐसे में हर साल इस कुंड में केवल काशी ही नहीं बल्कि समूचा पूर्वांचल उमड़ता है। लोग पूरी आस्था के साथ यहां आते हैं और कुंड में स्नान करते हैं। गीले वस्त्र, जूता-चप्पल और वो सब कुछ जो शरीर पर धारण किए होते हैं वहीं छोड़ जाते हैं। कुंड में मनोकामना पूर्ति के लिए भतुआ (कोहड़ा जिससे पेठा बनता है) चढाने का भी प्रावधान है।
यही नहीं मान्यता है कि इस कुंड में स्नान करने से कुष्ठ रोग से भी मुक्ति मिलती है। काशी के अस्सी क्षेत्र के भदैनी इलाके में है ऐसा कई गुणों वाला यह प्राचीन लोलार्क कुंड है। बताया जाता है कि यहां भगवान सूर्य ने सैकड़ो वर्ष तपस्या कर कुंड के साथ शिवलिंग की स्थापना की थी। कहा यह भी जाता है इस कुंड में स्नान करने से भगवान सूर्य निसंतान दंपति को संतान सुख देते है यही वजह है कि सूर्य उपासना के पर्व लोलार्क छठ को यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ता है ।
ऐसे में अब बुधवार को पड़ने वाले इस महा पर्व के लिए कुंड को पूरी तरह से सजा दिया गया है। भक्तों की भीड़ के मद्देनजर चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। दरअसल इस कुंड में जाने का रास्ता काफी संकरा है और भीड़ लाखों में होती है ऐसे में अक्सर दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। 2012 में कई महिलाएं अचेत हो गई थीं, कई लोग कुंड में गिर गए थे उसके बाद से प्रशासन भी इस महा पर्व को लेकर काफी सतर्क रहता है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहूलियत के मद्देनजर प्रशासन ने लोलार्क छठ मेले की तैयारियां पूरी कर ली । कुंड से दोनों तरह प्रशासन ने तीन किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग की है साथ ही धूप से बचने के लिए पर्दे भी लगाए गए है। अब बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच लाखों भक्त लोलार्क कुंड में स्नान करेंगे ।
Published on:
03 Sept 2019 06:02 pm

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