वाराणसी. शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हो गया। इस मौके पर देवी भक्तों ने सुबह सबेरे घरों में विधि विधान से कलश स्थापित कर दुर्गा पाठ शुरू किया। कही पुरोहितों ने घरों में पहुंच कर भक्तों का संकल्प कराया। फिर कलश स्थापन के साथ पूजन कार्य शुरू हुआ। वहीं देवी मंदिरों में भी पूजन-अर्चन का सिलसिला आरंभ हो गया। शारदीय नवारत्र के पहले दिन शक्ति स्वरूपा मां शैलपुत्री देवी के दर्शन-पूजन के लिए तड़के ही देवी भक्त निकल पड़े थे। अलईपुर क्षेत्र में स्थित माता शैलपुत्री के दर्शन-पूजन के लिए यूं तो प्रशासन की ओर से चाक चौबंद व्यवस्था की गई थी बावजूद इसके मुस्लिम बहुल इलाके में गंदगी का अंबार नजर आया। ऐसे में भक्तों को नांक-मुंह सिकोड़ते हुए गंदगी से बचते-बचाते मंदिर तक पहुंचते देखा गया। मंदिर क्षेत्र पूरी तरह से मेले में तब्दील हो गया है। यहां बचचों के खेलने के लिए खिलौने भी बिक रहें तो सौंदर्य प्रसाधन के सामानों की भी दुकानें फुटपाथ पर लगी थीं। कदम-कदम पर फूल माला की दुकानें भी सजी थीं। प्रसाद की भी दुकानें हैं। नारियल सहित मिठाइयां बिक रही थीं तो फलहार की भी व्यवस्था थी। मंदिर का रंग रोगन कर उसे खूबसूरत स्वरूप दे दिया गया था। मंदिर परिसर को विद्युतीय झालरों से सजाया गया है।

माता शैलपुत्री के अलावा दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर, संकठा मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, कामाख्या मंदिर में सुबह से ही भक्तों का रेला लगा रहा। भक्त जनों ने पूरी अकीदत से माता रानी के दर्शन-पूजन किए और मनवांक्षित कामना की। बता दें कि अब यह सिलसिला पूरे नौ दिन चलेगा। वैसे देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ तो दिन भर रहेगी लेकिन शाम ढलने के बाद इन मंदिरों की रौनक और बढ़ जाएगी।

देवी मंदिरों के अलावा शहर के छह स्थानों पर नवरात्र के पहले दिन से ही मूर्ति प्रतिष्ठापित कर पूजन अर्चन शुरू कर दिया गया। इसमें खास तौर पर सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति, टाउनहॉल, एसबी दुर्गोत्सव समिति, सुड़िया, शारदा विद्या मंदिर, मछोदरी, दुर्गा पूजनोंत्सव समिति दारानगर, नवयुवक दुर्गा पूजा समिति नवापुरा के पंडाल में देवी प्रतिमा स्थापित कर दी गई हैं। टाउनहॉल में कलश स्थापित कर पूजन शुरू किया गया है। वैसे अधिकांश पूजा पंडालों में नवरात्र की षष्ठी तिथि को माता का आगमन होगा, उसेक पश्चात सप्तमी तिथि को कल्पारंभ, नवपत्रिका पूजन के साथ देवी प्रतिमाओं को प्रतिष्ठापित किया जाएगा।

वैसे इस शिव की नगरी काशी में नवारत्र के पहले दिन से ही पूरा शहर शक्ति की आराधना में लीन है। चारों तरफ ध्वनिविस्तारक यंत्रों से देवी गीत सुनाई दे रहे हैं। मंदिरों के आसपास हो या मोहल्लों में धूप-दीप और लोहबान की खुशबू बिखरने लगी है। साथ ही साथ कुट्टू व सिंघाड़े के आंटे की नमकीन पूरी, पकौड़ी तथा तिन्ना व कुट्टू के चावल का भात व खीर की खुशबू से भी मोहल्ले व गलियां गमक रही हैं।