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वाराणसी के शूटर नेशनल प्रतियोगिता में लगातार सुधार रहे परफॉर्मेंस, पर नहीं लग रहा पदक पर निशाना, वजह जान आप भी होंगे हैरान

वाराणसी के कई सारे शूटर्स इस समय नई दिल्ली और भोपाल में चल रही राइफल और पिस्टल की नेशनल स्पर्धा में निशाना लगा रहे हैं। इसमें से अधिकतर शूटर ऐसे हैं जिनके पास अपनी गन नहीं है और ये किराए की या दोस्तों से मांग कर ली गई पिस्टल से निशानेबाजी में अपना हुनर दिखा रहे हैं पर इससे उन्हें पदक की उम्मीद नहीं है। आखिर क्यों वो अपनी गन नहीं खरीद सकते या उन्हें कोई और समस्या है। इन सब विषयों पर पत्रिका की वाराणसी के शूटिंग रेंज जिला राइफल क्लब से खास पेशकश ...

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Shooting range in Varanasi is in bad condition how will the medal come

वाराणसी में बदहाल है शूटिंग रेंज, कैसे आएगा पदक

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए सांसद खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन पूरे देश में करवा रहे हैं पर उनके संसदीय क्षेत्र में ही खिलाड़ियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिभावान खिलाड़ी भी ऐसे में अपनी प्रतिभा का गला खुद घोटने को विवश हो रहे हैं। उन्ही में से एक है शूटिंग, जिसके कई नेशनल और इंटरनेशनल प्लेयर वाराणसी में मौजूद हैं पर प्रतिभा के धनी इन शूटर्स को पदक पर निशाना लगाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। नेशनल और स्टेट प्रतियोगिता में रिनाउंड स्कोरिंग के बावजूद ये पदक तक स्पर्धा नहीं कर पाते क्योंकि इनकी शूटिंग की शुरुआत ही दिक्कतों में हैं। वाराणसी के एक मात्र शूटिंग रेंज जिला राइफल क्लब की बदहाली के साथ ही साथ शासन की शिथिलता खिलाड़ियों के सपनों का गला घोंट रही है।

लगातार बना रहे पॉइंट पर यहां रुकी है सफलता

जिला रायफल क्लब के शूटिंग रेंज पर 10 मीटर से लेकर 50 मीटर पिस्टल की प्रैक्टिस करने वाले शिवांशु सिंह ने बताया कि वो 10 मीटर में रिनाउंड शूटर हैं। उन्होंने बताया कि हम लोग अपनी वेपन्स नहीं खरीद सकते क्योंकि हमारे पास लाइसेंस नहीं है। यह खिलाड़ियों की सबसे बड़ी दिक्कत है इस शूटिंग रेंज पर, क्योंकि ऐसे में वो अपनी पिस्टल नहीं ले पा रहे और दोस्त या सीनियर की पिस्टल से हमें ट्रेनिंग करनी पड़ रही है। ऐसे में हम प्रैक्टिस किसी और वेपन से करते हैं और प्रतियोगिता में किसी और पिस्टल से निशाना साधना पड़ता है लेकिन हम पदक नहीं ला पा रहे हैं क्योंकि हमारे पास अपनी वेपन नहीं है।

हर खिलाड़ी वेट और हाइट अलग-अलग, बिना लाइसेंस पदक से दूर

राइफल क्लब के शूटिंग रेंज में प्रैक्टिस करने वाले राजवीर सिंह ने बताया कि वह नेशनल स्तर के रिनाउंड शूटर हैं। यहां खिलाड़ी लगातर अपने प्रदर्शन को सूधारने की कोशिश कर रहे हैं पर हमें अपने कोच, बड़ों या किराए पर पिस्टल लेकर प्रैक्टिस करना होता है और प्रतिस्पर्धा में किसी से किराए पर लेकर शूटिंग करनी पड़ती है। ऐसे में हमारे प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है क्योंकि हमारा लाइसेंस नहीं बन रहा ऐसे में हम अपना बेस्ट नहीं दे पा रहे हैं। राजवीर शिवांशु सिंह के भाई हैं। उन्होंने डीएम से अपील की कि वो लाइसेंस की प्रक्रिया जो एक वर्ष से उनके कार्यालय में लंबित है उसे सेंक्शन कर दिया जाए ताकि हम अपना वेपन लेकर प्रैक्टिस कर सकें।

दिव्यांग सुमेधा की पहल पर बना 10 मीटर रेंज पर रैम्प नहीं

रायफल क्लब शूटिंग रेंज में पिछले दस सालों से शूटिंग कर रहे डॉ रोहित सिंह नेशनल स्तर के खिलाड़ी हैं। वो रिनाउंड प्लेयर हैं और उनके पास अपनी खुद की पिस्टल है। डॉ रोहित ने बताया कि यह शूटिंग रेंज बहुत पुराना है और पहले ठीक हुआ करता था पर दस साल में इसकी हालत खराब हो गई है। अभी हाल ही में काशी की इंटरनेशनल दिव्यांग शूटर सुमेधा पाठक की पहल पर मोदी जी ने एक बिल्डिंग और उसमे 10 मीटर पिस्टल का शूटिंग रेंज बनवाया है। हम लोग प्रैक्टिस सेशन नहीं छोड़ते पर एक दिन उधर देखने गया तो देखा जिस दिव्यांग की पहल पर वह बिल्डिंग बनी है। उस बिल्डिंग दिव्यांग खिलाड़ी चढ़ ही नहीं सकते क्योंकि रेंज प्रथम तल पर है जिसपर सिर्फ सीढ़ी जाती है न लिफ्ट है न रैम्प तो ये लापरवाही है।

हमारी शूटिंग वर्ल्ड में अच्छी पर किराए की बन्दूक से कब तक

डॉ रोहित ने बताया कि वाराणसी में प्रतिभा की कमी नहीं है, न ही क्लब में पिस्टल की पर सब पुरानी और खराब हो चुकी है। इसके अलावा नए खिलाड़ियों का लाइसेंस नहीं बना है तो वो प्रैक्टिस के लिए दूसरों की पिस्टल पर निर्भर हैं। उन्होंने बताय कि वो खुद कई खिलाड़ियों को अपनी पिस्टल ट्रेनिंग को देते हैं, लेकिन कब तक चलेगी यह व्यवस्था। उन्होंने कहा कि हमारी शूटिंग वर्ल्ड में बेस्ट चल रही है पर जब शूटर दूसरे की पिस्टल से प्रैक्टिस करेगा और निशाना मैच में किसी और से लगाएगा तो पदक कब लाएगा। इसलिए उनका लाइसेंस बनना बहुत जरूरी है।

50 नेशनल शूटर बस कुछ ही के पास लाइसेंस

वहीं एक अन्य खिलाड़ी विप्लव गोस्वमी भी बिना लाइसेंस के नेशनल स्तर के खिलाड़ी हैं। उन्होंने बताया कि वो राइफल के नेशनल स्तर के खिलाड़ी हैं पर एमिनेशन की बहुत दिक्कत होती है। हम न अपनी गन एक्सपोर्ट कर सकते हैं और न ही गोली खरीद सकते हैं। हमें अपने दोस्तों पर निर्भर रहना होता है प्रैक्टिस सेशन में। उन्होने कहा कि जब तक हम गन नहीं चलाएंगे हमें नहीं पता चलेगा कि हमारा निशाना कितना अच्छा है और दोस्त कब तक अपनी राइफल देगा। उन्होंने बताया कि वाराणसी में 50 नेशनल और राज्य स्तर के रिनाउंड शूटर हैं पर लाइसेंस बस 20 या 22 लोगों के पास है जो बड़ी समस्या है।

यदि आप नेशनल या राज्य स्तर के शूटर हैं तो अवश्य मिलेगा लाइसेंस

इस संबंध में जब पत्रिका ने डीएम एस राजलिंगम से बात की तो उन्होंने कहा कि शूटरों की आड़ में गलत लोगों को लाइसेंस न मिले इसलिए इसपर सख्ती की जाती है और रोक लगाईं जाती है। यदि कोई राज्य स्तरीय या नेशनल स्तर का शूटर है और उसे इन प्रतियोगिताओं में खेलने की अनुमति है तो उसे अवश्य लाइसेंस दिया जाएगा। वह आकर हमसे सीधे मुलाकात कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है खिलाड़ी देश का नाम रौशन करें। ऐसे में वाराणसी में सिगरा स्टेडियम में इंटरनेशनल इनडोर स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है जिसमे शूटिंग रेंज भी बनाई जा रही है।

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