काशी की पहचान बाबा का दरबार है। प्रशासनिक नियंत्रण में आने के बाद से मंदिर परिक्षेत्र में सुरक्षा के नाम पर पूरी फौज उतार तो दी गई लेकिन सुरक्षा में जगह-जगह ऐसे छेद हैं कि बस इतना ही समझ लीजिए कि विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र की सुरक्षा भी भोलेनाथ के ही भरोसे हैं। प्रदेश सरकार ने कुछ वर्षों पूर्व अयोध्या, काशी व मथुरा के मंदिरों की सुरक्षा के बाबत तमाम तामझाम की व्यवस्था, निरीक्षण व अन्य मामलों के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया। इसमें केंद्र से लेकर प्रदेश तक की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों से लेकर डीजी, आइजी से लगायत एसएसपी तक होते हैं। कमेटी की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक तीन महीने में तीनों स्थाानों का निरीक्षण व सुरक्षा से संबंधित सामानों की उपलब्धता व मांग की रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजनी होती है। शुरूआती दौर में तो हर तीन माह बाद वाराणसी में अधिकारियों की फौज जुटती थी लेकिन धीरे-धीरे मीटिंग मनमाने ढंग से बुलाई जाने लगी। एक वर्ष पूर्व तो नौ माह से अधिक समय व्यतीत होने पर हाई पावर कमेट की बैठक शुरू हुई थी।