
रेलवे कैंसर हॉस्पिटल वाराणसी
वाराणसी. कैंसर जिसका नाम सुनते ही लोगों के होश उड़ जाते हैं। मरीज तो मरीज, तीमारदार और घरवालों को भी मानों कैंसर ने जकड़ लिया हो। हालांकि ऐसा नहीं कि कैंसर असाध्य बीमारी है, लेकिन इसके असाध्य होने के पीछे सबसे बड़ा कारण शुरूआती दौर में इस रोग की पहचान न होना है। ऐसे में मुंबई स्थिति टाटा मेमोरियल कैंसर रिसर्च सेंटर ने अब यह बीड़ा उठाया है कि वह पूर्वांचल और आसपास के डॉक्टरों खास तौर पर निजी प्रैक्टिसनर्स के लिए ट्रेनिंग की विशेष व्यवस्था करेगा ताकि इस रोग को जानलेवा बनाने से रोका जा सके। प्राथमिक स्तर पर ही इस घातक बीमारी का पता चल जाए और उसका सटीक उपचार शुरू हो सके। यह जानकारी होमी भाभा कैंसर अस्पताल, वाराणसी के निदेशक ने पत्रिका को दी।
टाटा कैंसर रिसर्च सेंटर की बड़ी पहल, अब प्राथमिक स्तर पर ही होगी कैंसर की पहचान
यूपी सहित आसपास के प्रदेशों में कैंसर रोगियों की लगातार बढ़ रही संख्या और रोग के पहचान में प्रैक्टि्सनर्स से हो रही चूक के मद्देनजर टाटा मेमोरियल कैंसर सेंटर मुंबई ने एक महत्वपूर्ण योजना बनाई है। इसके तहत टाटा पूर्वांचल व आसपास के इलाके के डॉक्टर्स को खास तरह की निःशुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे फर्स्ट स्टेज में ही रोग की पहचान हो सकेगी और उसका प्रॉपर इलाज किया जा सकेगा। प्रशिक्षित डॉक्टर अपने आसपास के कैंसर रोगियों का सही इलाज कर सकेंगे। योजना के तहत कुल साल भर की ट्रेनिंग होगी जिसमें नौ महीने की ट्रेनिंग बनारस तथा तीन महीने की ट्रेनिंग मुंबई स्थित कैंसर रिसर्च सेंटर में दी जाएगी।
टाटा कैंसर रिसर्च सेंटर निजी चिकित्सकों देगा ट्रेनिंग
टाटा कैंसर रिसर्च सेंटर ने वाराणसी के रेलवे कैंसर अस्पताल को होमी भाभा कैंसर अस्रपताल में तब्दील कर दिया है। इस अस्पताल कैंसर मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है। यहां के डॉक्टर कैंसर रोगियों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने का काम कर रहे हैं। लेकिन टाटा मेमोरियल कैंसर सेंटर मुंबई को इतने से ही संतोष नहीं वह चाहता है कि भाभा कैसर अस्पताल केवल इलाज ही न करे बल्कि इलाज करने वालों को दक्ष भी बनाए। टाटा अस्पताल प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स को स्पेशल ट्रेनिंग देने की रूपरेखा तैयार कर चुका है ताकि पूर्वांचल और आसपास के निजी प्रैक्टिसनर्स कैंसर विशेषज्ञ बन सकें।
पैथालॉजिस्ट, आंकोलाजिस्ट और सर्जन भी लेंगे प्रशिक्षण
टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट की योजना के मुताबिक कैंसर के इलाज के साथ एक्सपर्ट तैयार करने के तहत टाटा कैंसर रिसर्च सेंटर केवल डॉक्टर्स को ही ट्रेनिंग नहीं देगा बल्कि इसमें पैथालॉजिस्ट भी शामिल होंगे। उन्हें भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। खास तरीके से डिजाइन किए गए प्रोग्राम में आंकोलॉजिस्ट के अलावा सर्जन, फिजिशियन को भी शामिल किया गया है। इससे उनके पास पहुंचे मरीज में अगर कैंसर का पता चलता है तो शुरुआती दिनों में सटीक इलाज हो सकेगा। इससे रोग बढ़ने के बजाय उसे समय रहते ठीक करने में मदद मिलेगी।
रेलवे कैंसर अस्पताल की खास बातें
लागत- 150 करोड़ की लागत से अपग्रेड किया गया कैंसर हास्पिटल
20 कैंसर विशेषज्ञों की मिल रही है सुविधा
32 बेड हैं कैंसर के गंभीर रोगियों के लिए
172 बेड की व्यवस्था की जा रही है
50 से अधिक मरीज रोजाना पहुंचते हैं अस्पताल
100 करोड़ रुपये हर साल हास्पिटल के संचालन के लिए
बीएचयू में भी बन रहा कैंसर सेंटर
उधर बीएचयू के सुंदर बगिया में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर का निर्माण कार्य जारी है। इसका संचालन भी टाटा मेमोरियल कैसंर इंस्टीट्यूट मुंबई ट्रस्ट ही करेगा। कैंसर सेंटर में मुख्य अस्पताल का निर्माण खुद टाटा ट्रस्ट करा रहा है। इसके अलावा आवासीय व अन्य निर्माण सीपीडब्ल्यूडी करा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 दिसंबर 2016 को इस सेंटर की आधारशिला रखी थी। अब इसी साल इसे पूरा होना है। वर्तमान में पूर्वांचल व आसपास के इलाकों से हर साल करीब 50 हजार मरीज कैंसर के इलाज के लिए बीएचयू पहुंचते हैं।
बीएचयू में निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल की स्थिति
600 करोड़ है लागत
250 बेड का होगा यह कैंसर अस्पताल
10 मंजिला होगा यह भवन
15 एकड़ में होना है निर्माण कार्य
50 हजार प्रति वर्ष मरीज आते हैं बीएचयू
कोट-
कैंसर का शुरूआत में ही इलाज हो सके, इसके लिए टाट मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट ने यह योजना बनाई है। इससे एमडी, एमएस करके निकलने वाले डॉक्टर्स को साल भर की ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही अगर कोई प्राइवेट डॉक्टर भी यह प्रशिक्षण लेना चाहे तो उनके लिए भी यह सुविधा उपलब्ध है। लेकिन उन्हें इसके लिए आवेदन करना होगा। योजना के तहत सर्जन, आंकोलॉजिस्ट व पैथालॉजिस्ट को ट्रेंड किया जाएगा। इसके बाद वे अपने-अपने इलाके में कैसर रोगियों का इलाज कर सकेंगे। - डॉ नारायण, निदेशक, होमी भाभा कैंसर अस्पताल, वाराणसी।
Published on:
03 Aug 2018 12:52 pm
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