
फोटो सोर्स प्रियंका गांधी X अकाउंट
काशी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने घाट के ध्वस्तीकरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर जारी पुनर्विकास परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भाजपा सरकार पर धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि काशी की पहचान से जुड़े घाटों के साथ छेड़छाड़ आस्था और परंपरा दोनों पर चोट है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को न काशी की चिंता है। और न ही काशीवासियों की। उनका आरोप है कि यह पूरा काम केवल आर्थिक लाभ के लिए किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि अविनाशी काशी ही अंततः भाजपा के विनाश का कारण बनेगी।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, यह घाट न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बल्कि इससे लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की स्मृतियां भी जुड़ी हुई हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि विकास के नाम पर सीमित लोगों के व्यावसायिक हितों के लिए देश की सांस्कृतिक पहचान को मिटाना घोर पाप है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी काशी में नवीनीकरण के नाम पर कई प्राचीन मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को टैग करते हुए दो सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या विरासत को बचाकर जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण संभव नहीं था। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि सैकड़ों साल पुरानी मूर्तियों और कलाकृतियों को मलबे में क्यों डाला गया। जबकि उन्हें संग्रहालय में सुरक्षित रखा जा सकता था। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले भी संसद परिसर और जलियांवाला बाग जैसे स्थलों पर इतिहास से जुड़े प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया है।
दरअसल, मणिकर्णिका घाट पर लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास परियोजना चल रही है। इसके तहत कुछ हिस्सों को हटाया गया है और निकले मलबे को नावों के जरिए गंगा पार भेजा जा रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि तोड़फोड़ के दौरान मिली प्राचीन कलाकृतियों को सांस्कृतिक विभाग की मदद से संरक्षित कर गुरुधाम में सुरक्षित रखा गया है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर विकास और विरासत के संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां सरकार इसे आवश्यक पुनर्विकास बता रही है। वहीं विपक्ष इसे काशी की आत्मा पर आघात करार दे रहा है।
Updated on:
16 Jan 2026 08:05 am
Published on:
16 Jan 2026 08:04 am

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