
वाराणसी के सांस्कृतिक समूह "क्रिएटिव पपेट थियेटर ट्रस्ट" के तत्वावधान में कठपुतली कलाकार मिथिलेश दुबे और उनकी टीम द्वारा कठपुतली नाटक "मोहन से महात्मा" की प्रस्तुति बुधवार को लोहटिया स्थित बाल भारती पब्लिक स्कूल में की गई। महात्मा गांधी की जीवन गाथा पर आधारित 52 मिनट के इस कठपुतली नाटक में 07 कलाकारों द्वारा कुल 150 कठपुतलियों का प्रयोग किया गया है। इसके निर्माण में आईआईटी, बीएचयू का सहयोग प्राप्त हुआ है। नाटक में गांधी जी के बचपन से पढाई तक की प्रमुख बातों, स्वाधीनता आंदोलन, देश का बंटवारा और स्वाधीनता आदि घटनाक्रम को बहुत ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है। गांधीजी के बचपन से अफ्रीका प्रवास, नमक सत्याग्रह, भारत छोडो आंदोलन, दांडी मार्च, स्वतंत्रता एवं देश विभाजन आदि घटनाओं को कठपुतलियों ने जीवंत कर दिया है। यूं तो ये कठपुतली नाटक कई बार अलग-अलग जगहों पर दिखाया गया पर हर बार एक नया पहलू देखने और विचारने को मिलता है। फिर बच्चों के लिए तो यह एकदम से नया है। एक तो वर्तमान समय में यह कला ही बच्चों के लिए कौतूहल का विषय है दूसरे बापू के बारे में बताई गई बातें तो उनके लिए वास्तव में अनजानी सी हैं। सो उनका आकर्षित होना लाजमी है। संयोजक मिथिलेश दुबे का कहना है कि इस प्रस्तुति का उद्देश्य गांधी जी के जीवन संघर्ष के बारे में नयी पीढ़ी को अवगत कराना है।

इस अवसर पर गांधी जी के जीवन ने विविध आयामों को दर्शाने वाले चित्रों की प्रदर्शनी "बहुरूप गांधी" भी लगाई गई। इसमें चित्रों के माध्यम से गांधी जी की दैनिक जीवन चर्या और संदेशों पर प्रकाश डाला गया। शिक्षकों और बच्चों ने इस कार्यक्रम में बहुत रूचि दिखाई और नोट्स तैयार किए।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य मेंहदी बख्त ने कहा कि महात्मा गांधी के विचारो की प्रासंगिकता आज भी पूरे विश्व में है। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को कभी विस्मृत नही किया जा सकता। नई पीढ़ी को गांधी और उनके विचारों को अधिक से अधिक पढने और समझने की जरूरत है।

आयोजन में प्रमुख रूप से दीन दयाल सिंह, सुनील कुमार, डा किरण सिंह, हरिश्चंद्र यादव, मोईन खान, अनिल कुमार, सूरज, पंकज, जितेंद्र, विशाल आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।