10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ज्ञानवापी प्रकरण पर काशी में शुरू हुआ संत सम्मेलन, संतों का ऐलान कोर्ट का फैसला आने तक पूजा नहीं तो नमाज भी नहीं, मुसलमानों की आवाजाही बंद हो

ज्ञानवापी प्रकरण पर एक तरफ जहां न्यायालयों में दायर याचिका पर जिला कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में वाद विचाराधीन है। जिला कोर्ट जुलाई में मुकदमें की पोषणीयता पर सुनवाई करेगी। इस बीच काशी के संत समाज ने आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। शुक्रवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही में आयोजित संत सम्मेलन में संतों ने ऐलान किया है कि कोर्ट का फैसला आने तक पूजा नहीं तो नमाज भी बंद हो। सम्मेलन अभी जारी है।

2 min read
Google source verification
ज्ञानवापी प्रकरण पर लमही में शुरू हुआ संत समागम

ज्ञानवापी प्रकरण पर लमही में शुरू हुआ संत समागम

वाराणसी. ज्ञानवापी प्रकरण पर काशी का संत समाज मुखर हो गया है। पिछले दो दिनों में सनातन हिंदू समाज के तीन पीठ के शंकराचार्यों का संदेश सामने आया। इसके तहत जहां पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने ज्ञानवापी से लेकर मक्का तक पर अपने विचार मीडिया से साझा किए तो गुरुवार को ज्योतिष एवं शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के संदेश के आधार पर उनके शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को ज्ञानवापी मस्जिद में मिली शिवलिंगनुमा आकृति के अभिषेक व पूजन का ऐलान किया। अब शुक्रवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही में शुरू हुए संत सम्मेलन में संतों ने कहा है कि कोर्ट का फैसला आने तक पूजा नही तो नमाज भी बंद हो।

ज्ञानवापी में हिंदुओं के साथ मुस्लिमों का आवागमन भी प्रतिबंधित हो

लमही के सुभाष भवन में शुक्रवार को काशी धर्म परिषद के तत्वावधान में संत सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान पातालपुरी मठ के महंत स्वामी बालक दास ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंगनुमा आकृति मिली है, बावजूद इसके हमें हमारे आराध्य देवता की पूजा करने से रोका जा रहा है। वहीं मस्जिद में आमदिनों की तरह नमाज पढ़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि हमारी पूजा पर रोक है तो नमाज अदा करने पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मस्जिद में नमाज अदा की जाएगी तो हम भी पूजा करने की मांग करेंगे। ऐसे में एक ही तरीका है कि जब तक इस मामले में कोर्ट का फैसला नहीं आता तब तक ज्ञानवापी में हिंदुओं के साथ ही मुस्लिमों के आवागमन पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। दोनों पक्षों के साथ एक तरह का व्यवहार किया जाए।

ये भी पढें- ज्ञानपावी प्रकरण पर बोले शंकराचार्य निश्चलानंदः रसखान और रहीम को आत्मसात करें मुसलमान, मिलकर साथ चलें...

संत समाज, इतिहासकार जुटे हैं समस्या का स्थाई हल निकालने

पातालपुरी मठ के महंत ने कहा कि काशी धर्म परिषद की ओर से आयोजित संत सम्मेलन में संत समाज अपनों के साथ ही विधिवेत्ताओं और इतिहासविदों संग विचार विमर्श कर रहा है। उन्होने कहा कि हम उत्तेजना या विवाद का माहौल नही तैयार कर रहे बल्कि ज्ञानवापी प्रकरण के सही व स्थाई समाधान तलाशने को जुटे हैं। इस दौरान ज्ञानवापी सहित जो अन्य देव स्थल ध्वस्त किए गए हैं उन पर भी चर्चा करेंगे।

ये भी पढें- ज्ञानवापी प्रकरण में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का संदेश, मस्जिद में मिली शिवलिंगनुमा आकृति की नियमित पूजा हो, शनिवार को होगी पूजा

शिवलिंग साबित नहीं तो फौवारा कैसे

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का तर्क है कि ज्ञानवापी परिसर में जो शिवलिंगनुमा आकृति मिली है। उसे प्रामाणिक तौर पर अभी शिवलिंग नहीं कहा जा सकता, तो मेरा ऐेसे लोगों से सवाल है कि अगर ये शिवलिंग नहीं तो उसे फौवारा कैसे कहा जाय। पुराणों और इतिहास के आधार पर ये प्रमाणित होता है कि ज्ञानवापी में जो आकृति मिली है वो शिवलिंग ही है।