
जल दिवस पर स्कूली छात्रों ने गंगा घाट पर बनाई मानव श्रृंखला
वाराणसी. विश्व जल दिवस पर गुरुवार को बनारस के गंगा घाट पर स्कूली बच्चों ने बनाई मानव श्रृंखला और नदियों के संरक्षण में सहयोग का लिया संकल्प। इस मौके पर जहां चेतसिंह किला घाट से असि घाट तक मानव श्रृंखला बनाई गई वहीं तुलसीघाट पर संगोष्ठी आयोजित की गई। यह सारा आयोजन संकट मोचन फाउंडेशन व मदर फॉर मदर ने मिल कर किया। जल दिवस के मौके पर रेडियो आर्टिस्ट व भोजपुरी गीतों के शाहंशाह पंडित हरिराम द्विवेदी ने पर लिखे गीत, 'मयार्दा है, इस देश की पहचान है गंगा...' की प्रस्तुति देकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। फिर पंडित श्रतुराज कात्यायन ने गंगा पर आधारित मंगलाचरण की प्रस्तुति दी।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा की 1984 में देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने राजेन्द्र प्रसाद घाट से गंगा सफाई अभियान का शुभारंभ किया, तब से लेकर अब तक गंगा की स्थित सुधरने की बजाय बद से बदतर ही होती जा रही है। पहले 16-17 नाला ही गंगा में गिरते थे, जिनके माध्यम से 150 मिलियन लीटर मल-जल का गंदा पानी जाता था, वर्तमान में 32 नाले गंगा में गिर रहे है, जिनके माध्यम से 350 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी गंगा में गिर रहा है। गंगा सफाई की बात तो हर फोरम पर हो रही है, लेकिन कुछ दिख नहीं रहा है, दिखे तब जब कुछ हो। उन्होंने कहा कि गंगा हमारी संस्कृति, सभ्यता की जननी होने के साथ देश की लाइफ लाइन है। इसके लिए जनमानस को आगे आना होगा। गंगा के प्रति लोगें को जागरूकर करना होगा, तभी मां गंगा बचेंगी अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब गंगा को भी सरस्वती नदी की तरह किस्से कहानियों में पढ़ा जाएगा। प्रो. मिश्र ने मदर फॉर मदर संस्था के लोगों की सराहना करते हुए कहा की इस महत्वपूर्ण दिवस पर काफी संख्या में महिलाओं की भागीदारी यह दिखलाता है की मां गंगा के लिए महिलाएं भी आगे आ रही है, जब तक देश की आधी आबादी मां गंगा से नहीं जुड़ेगी गंगा प्रदूषाण मुक्त नहीं होगी।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ पृथ्वीश नाग ने कहा की गंगा के लिए सबको आगे आना होगा और इनकी सफाई तकनीक, सामाजिक व धार्मिक सहयोग से करना होगा तभी यह साफ होंगी। विशिष्ट अतिथि सीआरपीएफ के कमांडेंट आरपी सिंह ने कहा की गंगा तब तक प्रदूषण से मुक्त नहीं होंगी जब तक इसमें आम जनों की भागीदारी नहीं होगी। ऐसे में गंगा के प्रति सभी लोगों को आगे आना होगा तभी मां गंगा प्रदूषण मुक्त होंगी।
त्रिपुरा से आये धर्मगुरू गौतम मिश्रा ने कहा की हम लोग पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघालय, अरूणांचल प्रदेश में गंगा जल को डब्बों में लेकर जाते है और जल को धार्मिक आयोजन में प्रयोग करते हैं। गंगाजल हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। गंगा हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक महत्वपूण है। इन्हें हर हाल में बचाना होगा। स्वामी अखंडानंद जी महाराज ने कहा की गंगा सिर्फ नदि ही नहीं बल्कि वह हमारी मां भी है। इस नाते हमें हर हाल में मां गंगा को बचाना होगा। अगर गंगा नहीं रहेगी तो हमारी संस्कृति व सभ्यता भी नहीं बचेंगी। मदर फॉर मदर की संस्थापक अध्यक्ष आभा मिश्रा ने कहा की मदर फॉर मदर मां गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। इसके लिए हम पूरे देश में जन जागरूकता चलाकर सबसे पहले महिलाओं को जोड़ेगें, क्योंकि जब तक इस अभियान से महिलाएं नहीं जुड़ेंगी तब तक मां गंगा प्रदूषण मुक्त नहीं होगी। संगोष्ठी को आईएमएस बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. टी महापात्रा, सरोजनी महापात्रा, लिपिका बोस आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संयोजन अशोक पांडेय व राजेश मिश्रा ने किया। संचालन रामयश मिश्र व राजेन्द्र दूबे ने किया। केन्द्रीय ब्राम्हण महासभा के अध्यक्ष सतीश चन्द्र मिश्र ने आभार जताया।
इस अवसर पर विनोद तिवारी, हरदत्त शुक्ला, हृदय नारायण मिश्र, रमेश दत्त पांडेय, गोपाल पांडेय, विजय त्रिपाठी, सरिता अग्रवाल, तनू शुक्ला, सरोज पांडेय , नरेन्द्र त्रिपाठी, अमित मिश्रा, विश्वनाथ यादव ऊर्फ छेदी सहित काफी संख्या में काशी के नागरिक उपस्थित थे। नवनीता कुंवर पब्लिक स्कूल, मां शारदे पब्लिक स्कूल, डाफी, गंगा ज्ञानदीप स्कूल के बच्चों ने रंगकर्मी राजकुमार के संयोजन में मां गंगा पर आधारित नाटक व नृत्य की सुन्दर प्रस्तुति दे कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। मानव श्रृंखला में वेदांत शिक्षा निकेतन, संस्कृत विद्यालय, मीरघाट, डब्लूएच स्मिथ, तुलसी विद्या निकेतन, मां शारदे पब्लिक स्कूल, नवनीता कुंवर पब्लिक स्कूल, वेदांत कोचिंग, नंदलाल बाजोरिया संस्कृत विद्याल व प्राइमरी स्कूल के बच्चे शामिल थे।
Published on:
22 Mar 2018 04:23 pm

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