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छात्रसंघ चुनाव पर बाढ़ की छाया

इधर शहर का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ में डूबा हुआ है, ऐसे में बाढ़ का असर कम होने के बाद ही परिसर में चुनाव होना सम्भव हो पायेगा

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Sarweshwari Mishra

Aug 26, 2016

Mahatma Gandhi Kashi VidyaPeeth

Mahatma Gandhi Kashi VidyaPeeth

वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में होने वाले छात्रसंघ चुनाव पर बाढ़ की छाया पड़ चुकी है। शहर का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ में डूबा हुआ है और जिले से जुड़े अन्य जनपदों की भी स्थिति अच्छी नहीं है, ऐसे में बाढ़ का असर कम होने के बाद ही परिसर में चुनाव हो पायेंगे।


काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रचार चरम पर पहुंच गया है। छात्रनेताओं को चुनाव तिथि का इंतजार है। विश्वविद्यालय प्रशासन भी जल्द चुनाव कराना चाहता है, ताकि परिसर का बवाल खत्म हो सके। चुनाव अधिकारी की नियुक्ति भी हो चुकी है, लेकिन बाढ़ के चलते चुनाव तारीख घोषित नहीं हो रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बाढ़ के पहले चुनाव कराया जायेगा तो प्रत्याशी को नुकसान हो सकता है। छात्रों की बड़ी संख्या बाढ़ से प्रभावित है और वह चुनाव के दिन परिसर में आकर मतदान नहीं कर पायेंगे। इसके चलते प्रत्याशियों को नुकसान हो जायेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन चाहता है कि बाढ़ का असर कम हो जाये तब चुनाव तिथि जारी की जाये।



आयुष प्रवेश परीक्षा ने भी बढ़ायी परेशानी
काशी विद्यापीठ को आयुष प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी मिली है। परिसर में इस समय प्रवेश परीक्षा की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यदि छात्रसंघ चुनाव 15 सितम्बर तक नहीं होते हैं तो चुनाव टालना भी पड़ सकता है क्योंकि कोर्ट के निर्देश पर ही आयुष की अलग से प्रवेश परीक्षा करायी जा रही है और इसकी तिथि में परिवर्तन किसी भी हाल में नहीं हो सकता है।




अधिकांश सीटे हुई फुल, बढ़ेगी मतदाताओं की संख्या
परिसर में इस बार समय से प्रवेश हो गया है। अधिकांश सीटे भर चुकी है और कुछ सीटे खाली है उन्हें जल्द भरने का दावा किया जा रहा है। यदि चुनाव से पहले सारी सीटे भर जाती है तो इस बार मतदाताओं की संख्या बढ़ जायेगी।



छात्रसंघ का अंतिम चुनाव न हो जाये
प्रत्याशियों ने इस बार चुनाव जीतने के लिए पानी की तरह पैसा बहाना शुरू कर दिया है। प्रत्याशियों का कहना है कि अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव होने है यदि सपा वापसी नहीं करती है तो विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए इस बार चुनाव लडऩा सही होगा।

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