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यह धर्मयुद्ध है, या तो आप गौ माता के साथ हैं या खिलाफ: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द ने गौ माता की रक्षा के लिए धर्म युद्ध का ऐलान किया है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश की सरकार पर आरोप लगाया कि यह वहीं सरकार है जो गौ माता की रक्षा करने का वचन देकर सत्ता में आई थी, लेकिन गौ माता की हत्या नहीं रुक रही है...

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वाराणसी: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द ने गाय को राज्य माता का दर्जा दिए जाने के लिए 'धर्म युद्ध' का ऐलान किया है।उन्होंने कहा कि जो लोग हमारी गौ माता के साथ हैं, वह भाई हैं या फिर कसाई। उन्होंने वर्तमान की केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदुओं की सरकार होते हुए भी गौ माता की हत्याएं नहीं रुक रही हैं। यह वही सरकार है जिसने गौ माता की रक्षा करने का वचन लिया था और सत्ता में आई थी।

एक मार्च को 'धर्म युद्ध' का ऐलान

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने कहा है कि गौ माता को राज्य माता का दर्जा देने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, जिसमें से 20 दिन पूरे हो चुके हैं। 1 मार्च को वह इसके लिए 'धर्म युद्ध' का ऐलान करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें देशभर से साधु-संतों का समर्थन मिल रहा है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी के मुख्यमंत्री के साथ होने को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि हमने उन्हें विपक्ष के रूप में चुना है, क्योंकि वह गौ माता की रक्षा के लिए हमारे साथ लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं।

जो गौ माता के साथ नहीं वह कसाई

शंकराचार्य ने कहा कि जो लोग भी गौ माता के साथ हैं वह हमारे भाई हैं, अन्यथा हम उन्हें कसाई के रूप में देखते हैं। जो गौ माता की रक्षा नहीं कर सकता, वह कसाई ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम धर्म युद्ध से असली और नकली हिंदू की पहचान करवाना चाहते हैं और असली और नकली हिंदू की घोषणा 1 मार्च को करेंगे।

लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं

शंकराचार्य ने कहा कि यह आंदोलन किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, यह सिर्फ गौ माता की रक्षा के लिए है। गाय को पशु और मां मानने वालों में किस तरह का अंतर होता है, यह आंदोलन उसके लिए होगा। शंकराचार्य ने कहा कि सत्ता के साथ भले ही भीड़ हो, लेकिन मैं सत्य के पथ पर हूं और सत्य अकेला सभी पर भारी पड़ता है। इसे पराजित नहीं किया जा सकता। शंकराचार्य ने 10 दिनों के भीतर देश के सभी धर्माचार्य को स्पष्ट करने को कहा है कि वह इस 'धर्म युद्ध' में किसकी तरफ हैं।

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