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सपा से शिवपाल यादव के अलग होने से कितना बदल जायेगा पूर्वांचल का सियासी समीकरण

इन्हीं क्षेत्रों में है सपा व बसपा का मुख्य जनाधार, पीएम मोदी की लहर न चले तो बीजेपी का डंका बजना कठिन

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Shivpal Yadav and Mukhtar Ansari

Shivpal Yadav and Mukhtar Ansari

वाराणसी. शिवपाल यादव ने सपा से अलग होकर अपना नया सुक्युलर मोर्चा बना लिया है। शिवपाल यादव ने सपा के असंतुष्टों को साथ मिलने का भी ऐलान किया है। बड़ा सवाल है कि शिवपाल यादव का प्रयास कितना रंग लायेगा। पूर्वांचल में सपा का मजबूत जनाधार है इस वोट बैंक पर शिवपाल यादव का कितना प्रभाव पड़ेगा। यह मोर्चा का भविष्य तय करेगा।
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मुलायम सिंह यादव ने गंभीर होकर जिस तरह से सपा से शिवपाल यादव को साइड लाइन किया था वह घटना बताती है कि नेता जी को सपा में बिखराव का पहले से अंदाजा हो गया था। मुलायम के परिवारिक विवाद के चलते सपा को यूपी चुनाव में हार मिली थी लेकिन मुलायम सिंह यादव ने पार्टी की सारी शक्तियों को अखिलेश यादव को सौंपने में कामयाब हो गये थे। इसे मुलायम सिंह यादव की सबसे बड़ी राजनीति जीत भी माना जा सकता है। अखिलेश यादव के हावी होते ही शिवपाल यादव का पार्टी में कोई भूमिका नहीं रह गयी थी। जो नेता कभी शिवपाल यादव के खास माने जाते थे वह भी अखिलेश यादव के साथ हो गये थे। ऐसे नेता जानते थे कि पार्टी में अखिलेश यादव का कद वहां तक पहुंच गया है जहां से उन्हें कोई भी नजरअंदाज करके पार्टी में नहीं रह सकता है। ऐसे में सपा में शिवपाल यादव के साथ ऐसा कोई बड़ा नेता नहीं बचा है जो उनके लिए सपा छोडऩे को तैयार हो जायेगा।
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पूर्वांचल के सियासी समीकरण को अधिक प्रभावित नहीं कर पायेंगे शिवपाल यादव
पूर्वांचल में मुसलमानों के दमदार नेता माने जाने वाले बाहुबली मुख्तार अंसारी के लिए शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव से सीधी अदावत कर ली थी और अंत में अखिलेश यादव ने सपा से मुख्तार अंसारी की पार्टी कौएद का विलय खत्म करा दिया था। इसके बाद अंसारी बंधु ने बसपा का दामन थमा है। इस बात की बहुत कम संभावना है कि अब अंसारी बंधु बसपा को छोड़ कर शिवपाल यादव के साथ आयेंगे। पूर्वांचल के सपा नेता जानते हैं कि बीजेपी को लाोकसभा चुनाव 2019 में हराने के लिए महागठबंधन किया गया है। महागठबंधन की ताकत के आगे शिवपाल यादव का मोर्चा चलने वाला नहीं है। शिवपाल यादव के पास पूर्वांचल में कद्दावर नेता नहीं है। सपा से किनारे किये गये नेता इस हाल में नहीं है कि अपने बल पर शिवपाल यादव की पार्टी को खड़ा करे। किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए बूथ स्तर के कार्यकर्ता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवपाल यादव के पास ऐसी कार्यकर्ताओं की फौज तक नहीं है। कहा जाता है कि युवा जिसके साथ जाते है वह दल चुनाव जीत जाता है। सपा के युवा वोटरों के लिए सबसे बड़ा नेता अखिलेश यादव है यहां भी शिवपाल फिट नहीं होते हैं ऐसे में पूर्वांचल में शिवपाल यादव के लिए सियासी समीकरण बदल पाना बेहद कठिन है।
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तो फिर वोट कटवा तक हो जायेगी भूमिका सीमित
लोकसभा चुनाव 2019 में शिवपाल यादव का मोर्चा चुनाव लड़ता है तो उसकी भूमिक अधिक नहीं होगी। यह माना जा सकता है कि वोट कटवा तक ही उनकी पार्टी की भूमिका हो सकती है। शिवपाल यादव का साथ अमर सिंह दे सकते हैं क्योंकि दोनों नेेताओं को सपा से दिक्कत है। शिवपाल यादव ने नया मोर्चा बना कर सपा में बिखराव की शुरूआत कर दी है अब देखना है कि उनका यह दांव कितना कामयाब हो पाता है।
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