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काशी के अनोखे पिता जो करते हैं हर वर्ष अजन्मी बेटियों का पिंडदान और श्राद्ध कर्म, गंगा तट पर निभाई परंपरा

Pitru Paksha 2023: धर्म की नगरी काशी में पितृपक्ष में लाखों श्रद्धालु अपने पितरों का त्रिपिंडी श्राद्ध करने आते हैं, पर हर बेटियों के पिता डॉ संतोष ओझा हजारों बेटियों का पिंड दान गंगा तट पर करते हैं।

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Shraddha ceremony of 15 thousand unborn daughters on the banks of Ganga in Varanasi

Pitru Paksha 2023

Pitru Paksha 2023: पितृपक्ष में मातृ नवमी पर उन माताओं-बहनों का श्राद्ध कर्म किया जाता है जिनकी मृत्यु का समय न पता हो। ऐसे में काशी के रहने वाले डॉ संतोष ओझा, जो कि अजन्मी बेटियों के पिता के रूप में पूरे काशी में जाने जाते हैं ने प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर 15000 अजन्मी बेटियों का सामूहिक पिंडदान कर उनकी आत्मा की शान्ति की प्रार्थना की। साल 2013 से गर्भ में मार दी गईं अजन्मी बेटियों का डॉ संतोष ओझा श्राद्ध कर रहे हैं।श्राद्ध की दृष्टि से उत्तम काल, मध्याह्न में त्रिपिंडी श्राद्ध के विधान आरंभ हुए। श्राद्ध में प्रत्येक अजन्मी बेटी के निमित्त जौ, चावल और खोआ का पिंड बना कर उसका दान किया गया। गंगा तट पर इस श्राद्ध कर्मकांडी ब्राह्मण श्रीनाथ पाठक ‘रानी गुरु’ के सानिध्य में पंडित दिनेश दुबे के आचार्यत्व में हुआ।

अंतिम प्रणाम का दिव्य अनुष्ठान

काशी के दशाश्वमेध तीर्थ पर पितृपक्ष में रविवार को भी मातृ नवमी का मान किया गया। इस मौके पर काशी की सामाजिक संस्था आगमन की ओर से कोख में मारी गई बेटियों के श्राद्ध का दुर्लभ अनुष्ठान काशी में किया गया। इस सम्बन्ध में अजन्मी बेटियों के पिता डॉ संतोष ओझा ने बताया कि आगमन संस्था द्वारा अजन्मी बेटियों के श्राद्ध का यह दसवां वर्ष है। इससे पूर्व के नौ वर्षों में 67 हजार अजन्मी बेटियों के लिए सविधिक मोक्ष अनुष्ठान करा गया। दसवें वर्ष 15 हजार अजन्मी बेटियों का श्राद्ध कराया जाना है। इस वर्ष के अनुष्ठान के बाद 10 वर्ष में कुल 82 हजार अजन्मी बेटियों के श्राद्ध का कर्मकांड पूरा हो चुका है।

12 वर्ष तक चलाया जनजागरण

डॉ संतोष ओझा ने बताया कि सन 2001 का वह दौर था जब हम आगमन टीम के साथ एड्स महामारी पर जन जागरण अभियान चलाया करते थे। उस दरमियान एक दिन हमारी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई जिसने बेटे के चाह में कन्या भ्रूण की हत्या पत्नी के गर्भ में ही करा दी। उसके लिए वह सामान्य घटना था लेकिन इस घटना ने ही हमें बेटियों के जन्म से जुडी बातों के लिए जनजागरण करने की प्रेरणा दी। अगले एक दशक से अधिक समय तक कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए आगमन संस्था की ओर से जनजागरण अभियान चलाए जाते रहे। इसके अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

अजन्मी बेटियों के पिता बन करना शुरू किया श्राद्ध

डॉ संतोष ओझा ने बताया कि 2013 में पुनः एक घटना से मारी गयी बेटियों के मोक्ष दिलाने का प्रेरणा मिली। विचार आया कि जब पेट में पल रही बेटियों को बचाने में सफल नहीं हो पाया तो कम से कम उनके मोक्ष की तो कामना कर ही सकता हूं। यही से बेटियों के मोक्ष के लिए ‘अंतिम प्रणाम का दिव्य अनुष्ठान’ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। काशी के विद्वान इस अनुष्ठान को लेकर एकमत नहीं थे। हमारे परिजन भी अनहोनी, अशुभता या बाधा को लेकर चिंतित थे। लिहाजा श्रेष्ठ विद्वानों से मिलकर शास्त्र सम्मत बातों की जानकारी और जैसे-तैसे परिजनों के नाराजगी और रजामंदी के बाद अनुष्ठान को काशी के दशाश्वमेध घाट पर प्रारंभ किया गया।