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गंगा न बुलाएंगी न पुकारेंगी, अब SMF के अध्यक्ष खुद मिलेंगे PM से

SMF स्टीयरिंग कमेटी का फैसला, अब बहुत हो चुका इंतजार, पीएम से मिल कर उन्हें बताएंगे काशी में गंगा स्वच्छता की हकीकत. साथ ही चर्चा होगी SMF के 10 साल पुराने प्रोजेक्ट पर.

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Ajay Chaturvedi

Oct 02, 2016

Ganga

Ganga

वाराणसी.
बहुत हो गया गंगा-गंगा का खेल। अब मां गंगा न किसी को बुलाएंगी न पुकारेंगी। अब तो गंगा प्रेमी संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष व बीएचयू आईआईटी के प्रोफेसर डॉ विश्वंभर नाथ मिश्र खुद फाउंडेशन की कोर कमेटी के सदस्यों से साथ प्रधानमंत्री से मिलेंगे। उन्हें बताएंगे काशी में गंगा स्वच्छता की हकीकत। यह फैसला रविवार को फाउंडेशन की स्टीयरिंग कमेटी ने फाउंडेशन डे पर लिया। बैठक में तय हुआ कि जल्द ही पीएम से मिलने का समय लिया जाएगा और फाउंडेशन स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य उनसे मिल कर गंगा स्वच्छता के फाउंडेशन के प्रोजेक्ट पर बात करेंगे। यह भी तय हुआ कि जिस प्रोजेक्ट को 10 साल से पीएमओ लटकाए रखा है उस पर निर्णायक फैसला हो जाए। अगर वह सही है तो उस पर काम हो अन्यथा नई तकनीक पर काम शुरू किया जाए। लेकिन गंगा-गंगा का खेल अब बंद हो।


बंद हो गंगा-गंगा का खेल
बतादें कि काशी वासी अब तंग आ चुके हैं गंगा-गंगा के खेल से। एक बार एक प्रधानमंत्री आए और राजेंद्र प्रसाद घाट से गंगा कार्य योजना की शुरूआत की। अरबों रुपये बह गए बंगाल की खाड़ी में। गंगा पहले से ज्यादा मैली हुईं। फिर दूसरे प्रधानमंत्री आए कहा, मुझे मां गंगा ने बुलाया है। तकरीबन ढाई साल बीत गए गंगा और मैली हुईं। इस बीच यूपी सरकार के एक कद्धावर मंत्री आए कहा, गंगा ने पुकारा है। वह भी लंबा-लंबा भाषण दे कर गए। गंगा का आंचल मैला का मैला ही रहा। ऐसे में अब गंगा प्रेमियों ने कुछ ठोस काम करने की पहल करने का बीड़ा उठाया है।






क्या तय हुआ एसएमएफ की स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में
एसएमएफ के चेयर पर्सन आईआईटी बीएचयू के प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र की अध्यक्षता में हुई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में एसएमएफ के संस्थापक निदेशक व आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय, स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य इंटरनेशनल सेंटर ऑफ जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायो टेक्नॉलजी के निदेशक पद्मश्री डॉ. वीर सिंह चौहान, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस चौहान, आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विजय नाथ मिश्र ने मिल कर तय किया कि अब गंगा स्वच्छता पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की जानी चाहिए। सदस्यों का कहना था कि पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने एसएमएफ के चेयरपर्सन से गंगा निर्मलीकरण पर खुद बात की थी। वह चाहते हैं कि गंगा साफ हों। लेकिन प्रशासनिक अमला हो या भाजपा के लोग उन तक सच्चाई पहुंचने ही नहीं दे रहे। आलम यह है कि गंगा को स्वच्छ करने के लिए गंगा घाटों पर जो पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं वह साल में छह माह तो बाढ के चलते बंद रहते हैं। शेष छह महीने में बिजली कटौती का दंश झेलते हैं। लिहाजा नाले का सारा पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। सदस्यों ने कहा कि काशी, गंगा और गंगा के घाट एक दूसरे के पूरक हैं। लिहाजा नालों का गंगा में गिरना बंद करना ही होगा। इस संबंध में डॉ. मिश्र ने पत्रिका को बताया कि बैठक में तय किया गया कि पीएम से जल्द ही समय लिया जाए। उन्हें एसएमएफ के प्रोजेक्ट की जानकारी दी जाए। बताया जाय कि किस तरह गंगा घाटों से छेड़ छाड़ किए बगैर घाटों के नीचे से इंटर सेप्टर पाइप लाइन डाली जाए।


क्या है इंटर सेप्टर पाइप लाइन प्रोजेक्ट
इंटर सेप्टर पाइप लाइन प्रोजेक्ट के तहत गंगा घाटों के नीचे पाइप लाइन बिछाई जानी है जो गुरुत्वा कर्षण के सिद्धांत पर काम करेगी। इसके लिए बिजली की कोई जरूरत नहीं होगी। इस पाइप लाइन से ही शहर के सारे नालों को जोड़ दिया जाएगा। यह पाइप लाइन बनारस के आखिरी छोर पर स्थित ढाब इलाके तक जाएगी। ढाब का सात किलोमीटर लंबा क्षेत्र खाली है। वहां कृषि योग्य भूमि भी नहीं है। लिहाजा ढाब में बनाया जाए ऑक्सीजेशन पॉंड। ऑक्सीजेशन पॉंड में दूषित जल चार चरण से हो कर शुद्ध हो कर निकलता है। शोधन के बाद नाले का पानी पुनः गंगा में गिराने अथवा कृषि योग्य हो जाएगा। स्टीयरिंग कमेटी के सदस्यों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 10 साल से पीएमओ में पड़ा है। अब इस पर चर्चा कर लिया जाए। अगर यह प्रोजेक्ट तार्किक है तो लागू हो अन्यथा कोई दूसरी नई तकनीक पर विचार हो। लेकिन गंगा स्वच्छता पर गंभीरता से काम हो।









नई तकनीक के अध्ययन को प्रो. मिश्र जाएंगे अमेरिका
डॉ. मिश्र ने बताया क बैठक में यह मुद्दा उठा कि गंगा स्वच्छता पर नई तकनी का अध्ययन करने के लिए संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष, मंदिर के महंत व बीएचयू आईआईटी के प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र जल्द ही अमेरिका जाएंगे। अमेरिका में नदियों को प्रदूषण से बचाने पर कुछ नए शोध हुए हैं। उन शोध के अध्ययन व विचार विमर्श के लिए प्रो. मिश्र को अमेरिका से बुलावा आया है।


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