एसएमएफ के चेयर पर्सन आईआईटी बीएचयू के प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र की अध्यक्षता में हुई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में एसएमएफ के संस्थापक निदेशक व आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय, स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य इंटरनेशनल सेंटर ऑफ जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायो टेक्नॉलजी के निदेशक पद्मश्री डॉ. वीर सिंह चौहान, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस चौहान, आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विजय नाथ मिश्र ने मिल कर तय किया कि अब गंगा स्वच्छता पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की जानी चाहिए। सदस्यों का कहना था कि पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने एसएमएफ के चेयरपर्सन से गंगा निर्मलीकरण पर खुद बात की थी। वह चाहते हैं कि गंगा साफ हों। लेकिन प्रशासनिक अमला हो या भाजपा के लोग उन तक सच्चाई पहुंचने ही नहीं दे रहे। आलम यह है कि गंगा को स्वच्छ करने के लिए गंगा घाटों पर जो पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं वह साल में छह माह तो बाढ के चलते बंद रहते हैं। शेष छह महीने में बिजली कटौती का दंश झेलते हैं। लिहाजा नाले का सारा पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। सदस्यों ने कहा कि काशी, गंगा और गंगा के घाट एक दूसरे के पूरक हैं। लिहाजा नालों का गंगा में गिरना बंद करना ही होगा। इस संबंध में डॉ. मिश्र ने पत्रिका को बताया कि बैठक में तय किया गया कि पीएम से जल्द ही समय लिया जाए। उन्हें एसएमएफ के प्रोजेक्ट की जानकारी दी जाए। बताया जाय कि किस तरह गंगा घाटों से छेड़ छाड़ किए बगैर घाटों के नीचे से इंटर सेप्टर पाइप लाइन डाली जाए।