देशव्यापी इस अभियान में जहाँ सरकार 6 से 14 वर्षों के बच्चों को साक्षर बनाने का ख्वाब देख रही है वही ग्रामीण आदिवासी अंचलों में दो जून की रोटी के जुगाड़ में लगे गरीब अपने बच्चों के सिर पर लकड़ी का गट्ठर ढुलाने को मजबूर हैं। जंगल की सूखी लकड़ियों के सहारे रोटी का जुगाड़ करने में लगे इन आदिवासियों में आज भी सरकार की योजनाओं का लाभ न मिलने से पूरे परिवार को मिलकर भूख मिटाने का जुगाड़ करना पड़ता है।