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 ग्रामीण इलाकों में नहीं दिख रहा सर्व शिक्षा अभियान का असर

यह अभियान सिर्फ नगर और शहरों तक ही सिमट कर रह गया है

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Ashish Kumar Shukla

Apr 26, 2016

education

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सोनभद्र.
जनपद के आदिवासी और सुदूर अंचलो में सरकार की सर्व शिक्षा अभियान फेल नज़र आ रही है। सरकार एक ओर जहाँ इस अभियान को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वही दूसरी ओर जनपद के आदिवासी अंचलों में बच्चे सर्वशिक्षा अभियान को ठेंगा दिखा रहे हैं। यह अभियान सिर्फ नगर और शहरों तक ही सिमट कर रह गया है।

देशव्यापी इस अभियान में जहाँ सरकार 6 से 14 वर्षों के बच्चों को साक्षर बनाने का ख्वाब देख रही है वही ग्रामीण आदिवासी अंचलों में दो जून की रोटी के जुगाड़ में लगे गरीब अपने बच्चों के सिर पर लकड़ी का गट्ठर ढुलाने को मजबूर हैं। जंगल की सूखी लकड़ियों के सहारे रोटी का जुगाड़ करने में लगे इन आदिवासियों में आज भी सरकार की योजनाओं का लाभ न मिलने से पूरे परिवार को मिलकर भूख मिटाने का जुगाड़ करना पड़ता है।

ऐसे में बच्चों में पढ़ाई को लेकर कोई भी चिंतित नज़र नहीं आता। अनमूमन ये हाल जनपद के रेणुकापार के सुदूर इलाकों और दुद्धी क्षेत्र के जंगली इलाकों में आसानी से देखने को मिलता है। जहाँ बच्चे सिर पर लकड़ी का गठ्ठर लिए पैसे का जुगाड़ करने में लगे रहते हैं। इनमें से कुछ तो स्कूली कपड़ों में ही आसानी से देखे जाते हैं।

पूछने पर मालूम चला कि सरकारी स्कूलों में मिलने वाला मध्यान्ह भोजन नाकाफी साबित होता है। वहीँ परिवार की जरुरतों को पूरा करने के लिए लकड़ी बेचने का काम करना पड़ता है।

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