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कभी ऑटो चलाता था पूर्वांचल का माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या, जानिए माफिया डॉन की अनसुनी कहानी

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Munna Bajrangi

मुन्ना बजरंगी

वाराणसी. यूपी समेत देशभर के अपराध जगत में अपने नाम का खौफ पैदा करने वाले माफिया डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई। आज पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में मुन्ना बजरंगी की बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी। मुन्ना बजरंगी को रविवार झांसी जेल से बागपत लाया गया था। उसे तन्हाई बैरक में कुख्यात सुनील राठी ओर विक्की सुंहेड़ा के साथ रखा गया था। जेल में ही मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। जेल में माफिया डॉन की हत्या से अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

कौन है मुन्ना बजरंगी
पिछले तीस सालों से यूपी समेत देश भर के अपराध जगत में अपने नाम से दहशत पैदा करने वाले माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे, मगर प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया। उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। किशोर अवस्था तक आते-आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जिससे वह जुर्म की दुनिया में कदम रखने से खुद को नहीं रोक पाए और बन गए माफिय डॉन। माफिया डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की पहचान जब डॉन के रूप में नहीं हुई थी तब ये मुंबई में सालों तक ऑटो चलाते थे। बाद में जाकर इन्हें अपराध के जुर्म में गिरफ्तार किया गया।

1982 में पहली बार दर्ज हुआ था मुकदमा
प्रेम प्रकाश उर्फ़ मुन्ना बजरंगी ने पहली बार 1982 में सुरेरी गांव में मारपीट की घटना को अंजाम दिया। पुलिस की डायरी में धारा 147, 148, 323 ipc के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। 1984 में रामपुर थाने में मुन्ना के खिलाफ पहली बार हत्या और डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ। मुन्ना के क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही दिनों मे मुन्ना के अपराध का सिलसिला इस कदर बढ़ा कि मुन्ना बजरंगी ने अपनी भूमिका यूपी के अंदर कांट्रेक्ट किलर के रूप में बनायी।

मुंबई में ली पनाह

यूपी पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी। उसका यूपी और बिहार में रह पाना मुश्किल हो गया था। दिल्ली भी उसके लिए सुरक्षित नहीं था। इसलिए मुन्ना भागकर मुंबई चला गया। उसने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा। इस दौरान उसका कई बार विदेश जाना भी होता रहा। उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे। वह मुंबई से ही फोन पर अपने लोगों को दिशा निर्देश दे रहा था।

कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप
2005 में मुन्ना बजरंगी पर कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप लगा था। उसमें मुख्तार अंसारी पर भी यह आरोप लगाया गया था कि कृष्णानंद राय की हत्या की सुपारी मुख्तार अंसारी ने मुन्ना बजरंगी को दी थी।