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Varanasi News : खतरनाक हुआ काशी का तुलसीघाट, फिर डूबा युवक, मौत

Varanasi News : खतरनाक हुए तुलसी घाट पर 26 मई को भी दो युवकों की डूबने से मौत हुई थी। इसके पहले 13 अप्रैल को भीलवाड़ा राजस्थान का एक श्रद्धालु इसी घाट पर डूबकर मरा था।

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Varanasi News : तुलसीघाट पर डूबने से बुधवार को एक और युवक की जान चली गई। शासन द्वारा लगाए गए चेतावनी बोर्ड की अवहलेना कर लोग इस घाट पर नहाने की कोशिश में लग जाते हैं और पोपले हो चुके घाट की गहराई की थाह नहीं मिलती जिससे लोग डूब जाते हैं। पिछले वर्ष मई माह में सेल्फी लेने के चक्कर में इस घाट पर डूबे तीन युवकों के बाद प्रशासन ने कई इंतजाम किए पर सब नाकाफी हैं और आज एकबार फिर एक युवक इस घाट पर डूब गया। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

स्थानीय गोताखोरों ने निकाला बाहर

प्राप्त जानकारी के अनुसार तुलसी घाट पर नहाते समय एक युवक अचानक से गहरे पानी में गायब हो गया। उसके साथ के लोगों ने शोर मचाया तो जल पुलिस और अन्य गोताखोरों ने गंगा में छलांग लगा दी। कुछ ही देर में उसे बाहर निकाल लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उस वक़्त उसकी सांस चल रही थी। लोग उसे ट्रामा सेंटर ले गए जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया।

प्रयागराज से आये थे काशी भ्रमण पर

पुलिस ने बताया कि प्रयागराज के सराय इनायत इलाके से 8 लोगों का दल काशी दर्शन-पूजन के लिए आया था। काशी में दर्शन-पूजन के बाद सभी गंगा स्नान के उद्देश्य से काशी के तुलसी घाट पहुंचे और आस्था की डुबकी लगा दी। इस दौरान नीलेश गुप्ता (18) अचानक गहरे पानी में चला गया। यह देख साथ के लोगों ने हल्ला मचाना शुरू किया तो गोताखोरों और मल्लाहों ने गंगा में डुबकी मार उसे बाहर निकला पर तब तक उसकी सांस उखड़ने लगी थीं।

पिछले वर्ष ही स्नान के लिए की गई थी मनाही

पिछले साल ही वाराणसी नगर निगम और पुलिस ने संयुक्त रूप से काशी के तुलसीघाट और ललिता घाट पर स्नान को प्रतिबंधित किया था। यहां बड़े साइन बोर्ड भी लगाए थे पर लोग इनपर ध्यान दिए बिना ही गंगा में स्नान करने के लिए कूद पड़ते हैं। काशी के इतिहास में इस घाट का अपना महत्त्व है। इसी घाट ओर तुलसीदास निवास किया करते थे।

भीड़ बढ़ने से हुआ है दुर्घटना में इजाफा

राजघाट पर गोताखोरी करने वाले मल्लाह बताते हैं कि 'बनारस के ज्यादातर घाट पोपले हो गए हैं। घाटों की अंदरूनी हालत खराब है। गंगा की जलधारा ने घाटों को अंदर तक पोपला कर दिया। गंगा में हो रही मौतों की चिंता सरकारी मशीनरी को नहीं है। हम दशकों से गोताखोरी कर रहे हैं। ऐसे भयावह मंजर पहले नहीं दिखते थे। विश्वनाथ कारिडोर बनने के बाद बनारस में भीड़ बढ़ गई है और सुरक्षा व्यवस्था सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी होने के कारण हादसों में इजाफा हुआ है। रामनगर से राजघाट के बीच अब आए दिन लोगों के डूबने और मरने की खबरें आ रही हैं।'

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