
UP leader's politics out of UP is too much
वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में पूर्व सीएम अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट पर पानी फिर गया है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में जनवरी में प्रवासी सम्मेलन कराने की तैयारी की है जिसे भी अब झटका लग चुका है। मंत्री, विधायक व अफसरों के गठजोड़ ने वरुणा को नया जीवन देने वाली योजना की हवा निकाल दी है।
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गंगा की तरफ वरुणा की दशा सुधारने के लिए सपा के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने मार्च 2016 में बनारस में वरुणा कॉरीडोर की नींव रखी थी। 201.65 करोड़ रुपये से भीमनगर के पास से आदिकेशव घाट तक कुल 10.03किलोमीटर तक पाथवे, रेलिंग, पांच घाट, रंगीन लाइट आदि बनने थे। प्रोजेक्ट को दिसम्बर 2016 में पूरा होना था। यूपी चुनाव के चलते यह प्रोजेक्ट लटक गया था बाद में यूपी में आयी बीजेपी सरकार ने प्रोजेक्ट को जल्द खत्म करने के लिए कई चेतावनी जारी की थी बाद में यूपी सरकार ने प्रोजेक्ट पर ध्यान देना ही बंद कर दिया। गंगा में आयी बाढ़ के चलते वरुणा का जलस्तर तेजी से बढ़ा और अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट डूब गया। इसके बाद भी अधिकारियों ने वरुणा कॉरीडोर की सुध लेना सही नहीं समझा। वरुणा कॉरीडोर के बन जाने से वरुणा नदी को नया जीवन मिलता। साथ ही जनवरी में प्रवासी सम्मेलन में आने वाले विदेशी लोगों के लिए यह पर्यटन का केन्द्र भी बन सकता था लेकिन प्रोजेक्ट पर पानी फिर गया है जिससे पीएम मोदी को भी झटका लगा है। बीजेपी एक तरफ राहुल गांधी, अखिलेश यादव व मायावती के महागठबंधन को लोकसभा चुनाव 2016 में अपने विकास के बल पर हराने की सोच रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी सरकार में ही विकास अब मजाक बनता जा रहा है जिसका सबसे बड़ा उदहारण वरुणा कॉरीडोर है।
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Published on:
04 Sept 2018 05:20 pm
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