
Violation of Street Vending Act 2014 in Benaras
वाराणसी. बनारस में विकास के नाम पर बगैर पुनर्वास का इंतजाम किए गरीब ठेला-खोमचा और पटरी व्यवसायियों को उजाड़ने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। यह हाल तब है जब इनके लिए 2014 में ही तत्कालीन केंद्र सरकार कानून पास कर चुकी है, लेकिन उस कानून का कम से कम बनारस में तो पालन होता नहीं दिख रहा है। नतीजा ठेला-खोमचा और पटरी व्यवसायी बेहाल हैं, उनकी रोजी रोटी छिन गई है। कैसे परिवार का भरण पोषण करें, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
बता दें कि ठेला, पटरी व्यवसायियों और खोमचा वालों को पुनर्वास का इंतजाम किए बगैर हटाने का काम पिछले पांच साल से चल रहा है। कभी शहरी क्षेत्र में इन व्यवसायियों को अतिक्रमण के नाम पर हटाया जाता रहा। इसमें लंका स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय की चहारदीवारी से सटे लगी दुकानें कई बार तोड़ी गईं। इसका जमकर विरोध भी हुआ लेकिन न सुनवाई हुई न पुनर्वास का इंतजाम। इसी कड़ी में राजातालाब क्षेत्र में फ्लाइओवर और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर इन्हें उजाड़ दिया गया। नतीजा यह कि उन्हें घर से बेघर कर खुले आसमान के नीचे गुजर-बसर करने पर विवश कर दिया गया है। रोजी रोटी का जरिया भी तहस-नहस कर दिया गया है।
हाईवे पर चले सड़क चौड़ीकरण के दौरान ऐसे तमाम गरीब बेसहारा लोग हैं जो विगत 50 साल से यहीं रह रहे थे या अपनी रोजी रोटी चला रहे थे। अब इनकी पुश्तैनी झोपड़ी भी नष्ट कर दी गई और सड़क किनारे लगी दुकानें भी जमींदोज कर दी गईं। यह सब तब है जब ये सभी नियमित रूप से इन जगहों पर निवास तथा व्यापार करते रहे। इन लोगों के नाम, मतदान परिचयपत्र, बिजली पानी का बिल तथा अन्य सरकारी देनदारी अदा करने की रसीदें भी हैं मगर शासन के इशारे पर प्रशासन ने किसी पर तवज्जो नहीं दिया और उजाड़ कर ही दम लिया।
दुकानदारों का सवाल, आखिर क्यों उजाड़ दिया हमें
वाराणसी-राजातालाब राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर करीब दो बरस पहले सब्जी मंडी रोड और चौराहा की पटरी पर चल रही ठेला पटरी की दुकानें उजाड़ दी गई थीं। रोजी-रोटी से महरूम हुए दुकानदारों में कई बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। अब उसी जगह अन्य लोगों ने अवैध कब्जा जमा रखा है। जिला प्रशासन के जिम्मेदार लोगों के पास आज इसका कोई जवाब नहीं है।
वर्ष 20017 में तत्कालीन एसडीएम ईशा दुहन की देखरेख में पूरे राजातालाब चौराहा को मास्टर प्लान के तहत अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया था। यह मार्ग भी इससे अछूता नहीं रहा था। मार्ग चौड़ीकरण, ओवरब्रिज बनाने के नाम पर यहां सभी ठेला पटरी दुकानों पर चले बुलडोजर से दुकानदारों की रोजी-रोटी छिन गई थी।
ठेला पटरी व्यवसायियों ने तब राजातालाब तहसील एसडीएम दफ्तर पर जोरदार प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा था। फिर एसडीएम ईशा दुहन दुकानदारों को व्यवस्थित करने के लिए ठोस निर्णय लिया था उन्हें बसाने के लिए। साथ ही, जब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था ना हो जाए तब तक राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे ट्रैफिक व्यवस्था को अवरुद्ध किए बिना व्यापार करने की छूट दी थी। उनका आई कार्ड बनाने का भी आश्वासन दिया था लेकिन हुआ कुछ नहीं। इसी बीच उनका तबादला कर दिया गया। प्रशासन से राहत न मिलने पर उजाड़े गए दुकानदारों का कई बार चालान भी काटा गया। ऐसे में वे कोर्ट कचहरी का चक्कर काटने को मजबूर हैं।
लड़ी जा रही है हक की लड़ाई
राजातालाब ठेला पटरी व्यवसायियों दुकानदारों के साथ जो हुआ, उसकी स्थानीय सामाजिक संगठनों ने तब भी निंदा की थी और अब भी उन उजाड़े गए दुकानदारों के साथ वो खड़े हैं। दुकानदार आवंटित दुकान में रोजगार कर रहे थे लेकिन उत्पीड़न उनका ही हुआ। उत्पीड़न के शिकार दुकानदार और सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता की अगुवाई में यह लड़ाई लड़ी जा रही है। दुकानदार अपना हक लेकर रहेंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने राजातालाब के ठेला पटरी व्यवसायियों को उजाड़ने को गैरकानूनी बताया है। कहा कि यह आजीविका संरक्षण फेरी नीति कानून 2014 का उल्लंघन है। यहां के ठेला फुटपाथ पटरी व्यवसायियों को बिना बसाए उजाड़ने को तुगलकी कार्रवाई बताते हुए पुनर्वास की मांग की गई।
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Published on:
20 Apr 2019 05:00 pm
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