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बनारस की रहने वाली है पूनम यादव, कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान

किसान बाप की बेटी है पूनम यादव

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Punam yadav

Punam yadav

वाराणसी. कॉमनवेल्थ गेम 2018 में बनारस की बेटी पूनम यादव ने स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया है। पूनम यादव ने 69 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। 22 साल की पूनम यादव ने राष्ट्रमंडल खेल 2014 में 63 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीता था। पूनम यादव ने पहले प्रयास में 95, दूसरे में 98 और तीसरी कोशिश में 100 किलो वजन उठाया। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 122 किग्रा रहा। इस तरह उन्होंने कुल 222 किग्रा वजन उठाकर स्वर्णपदक अपने नाम कर लिया।


कौन है पूनम यादव !
बनारस से 7 किलोमीटर दूर बसे गांव दादूपुर की रहने वाली पूनम यादव का जीवन गरीबी से लड़ते हुए बीता है। इनके पिता एक किसान है। खेती और पशुपालन के सहारे अपने परिवार की जीविका चलाते हैं। पूनम के पिता ने अपनी बेटियों को वेट लिफ्टिंग सिखाने के लिए अपनी भैस तक बेंच दी थी। इतना ही नहीं 7 लाख रुपए कर्ज भी लिया था। पूनम की बहनें शशि और पूजा भी वेटलिफ्टिंग की तैयारी में जुटी हैं। पूनम यादव वर्तमान में रेलवे में टीटीई के पद पर कार्यरत हैं। ग्लासगो में वह पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स खेली थीं।


पूनम यादव ने इससे पहले 2015 में इस टूर्नामेंट- 2014, ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: 63 किलोग्राम कैटेगरी में ब्रॉन्ज, 2014, अलमाटी (कजाखिस्तान) वर्ल्ड चैम्पियनशिप: 63 किग्रा कैटेगरी में 20वें नंबर पर रहीं थीं। 2015 में पुणे में हुई कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप: 63 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड, 2017 में कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप (गोल्ड कोस्ट): 69 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर, 2017- अनॉहाइम (अमेरिका) में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप: 69 किग्रा कैटेगरी में 9वें नंबर पर रहीं थीं। तब उन्होंने 218 किग्रा (स्नैच में 98 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 120 किग्रा) का वजन उठाया था।