
काशी विश्वनाथ मां पार्वती गौना उत्सव
वाराणसी. महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के उपरांत रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा विश्वनाथ के गौना की रस्म के उत्सव का क्रम में शनिवार को काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ कुलपति तिवारी के टेढीनीम स्थित आवास पर गौरा के रजत विग्रह को संध्याबेला हल्दी लगाई गई। इस बीच गवनहारिनों ने मंगल गीत गाए। उधर सोमवार के महा उत्सव की तैयारी दिन भर चलती रही।
बता दें कि काशी विश्वनाथ और मां पार्वती के गौने की रस्म की शुरूआत शुक्रवार को मां पार्वती को हल्दी-तेल लगाने से हुी थी। शनिवार की शाम महंत आवास पर गौरा के रजत विग्रह को संध्याबेला में हल्दी लगाई गई। महंत आवास पर गौरा के विग्रह के समक्ष सुहागिनों और गवनहिरयों की टोली संध्या बेला में महंत आवास पहुंची। इस उत्सव में मोहल्ले की बुजुर्ग महिलाएं भी शरीक हुईं।
रंगभरी एकादशी को विश्वनाथ मंदिर में बदला सप्तर्षि आरती का वक्त
रंगभरी एकदाशी के दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में शाम सात बजे होने वाली नियमित सप्तर्षि आरती का समय बदल दिया गया है। अब ये आरती दोपहर बाद तीन बजे से होगी। वहीं रात 9 बजे होने वाली शृंगार व भोग आरती शाम 5 बजे होगी। फिर रात 11.30 बजे तक मंदिर खुला रहेगा। ऐसा उस दिन मंदिर में रंगभरी एकादशी मनाने के चलते किया गया है। उस दिन बाबा विश्वनाथ और मां पार्वती की चल प्रतिमाओं का भव्य शृंगार किया जाएगा।
शनिवार की शाम भी हुए इस उत्सव में ढोलक की थाप और मजीरे की खनक के बीच मंगल गीत गाते हुए महिलाओं ने गौरा को ससुराल के नियम समझाए। मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान हो उठा। लोक संगीत के बीच बीच शिव-पार्वती के मंगल दाम्पत्य की कामना पर आधारित पारंपरिक गीतों का क्रम देर तक जारी रहा। मंगल गीतों में यह चर्चा भी की गई कि गौना के लिए कहां क्या तैयारी हो रही है।
रविवार को ससुराल पहुंचेंगे भोलेनाथ
गौरा को विदा कराने रविवार की शाम ससुराल पहुंचेंगे भोलेनाथ। ऐेसे में भोले बाबा के आगमन की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस मौके पर बाबा के लिए मेवे वाली ठंडई और विविध पकवान की व्यवस्था भी की जा रही है।
Published on:
12 Mar 2022 09:35 pm

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