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World No Tobacco Day: नहीं चेते तो हो सकते हैं नपुंसक

गुरुवार को है विश्व तंबाकू निषेध दिवस, इस मौके पर बीएचयू के दंत रोग विशेषज्ञ ने चेताया, दिए सुझाव। जानें क्या-क्या हैं खतरे...

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विश्व तंबाकू निषेध दिवस प्रतीकात्मक फोटो

विश्व तंबाकू निषेध दिवस प्रतीकात्मक फोटो

वाराणसी. तंबाकू की वजह से मुंख, फेफड़े और हृदय रोग, पेट में अल्सर, खून की बीमारी हो रही है। यहां तक कि आदमी में नपुसंकता एवं औरतों में कम वजन तथा समय से पूर्व व कम विकसित बच्चे हो सकते है। तंबाकू उपयोग करने का मुख्य कारण इसमें उपस्थित निकोटीन होता है जो ब्रेन में जाकर क्रियाशील महसूस कराता है लेकिन यह सब अस्थायी रूप से होता है। आगे चल कर यही एक लत (नशा) में तब्दील हो जाता है। पुरुष हो या महिला चिड़चिड़ापन व बेचैनी महसूस करने लगते हैं। आज के नए दौर में नई उम्र के लोग इसको एक फैशन एवं आनंद के लिए शुरू करते हैं, जो बाद में एक आदत सी बन जाती है। इससे अनेक रोगों का जन्म होता है। इस भागदौड़ की जिंदगी में तम्बाकू सेवन का एक मुख्य कारण तनाव भी होता है। तंबाकू उपयोग करने वालों में टीबी होने के अवसर तीन गुना और हृदय की बीमारी होने के दो गुना अवसर बढ़ जाते हैं। ऐसे लोग कम उम्र में भी ज्यादा उम्र के लगते हैं । डब्लूएचओ की एक गणना के अनुसार प्रत्येक साल 60 लाख लोग तंबाकू सेवन की वजह से मर जाते है। लगभग 6 लाख लोगों की मौत धूम्रपान करने वाले के साथ रहने की वजह से होती है। ये कहना है काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आईएमएस के दंत रोग विशेषज्ञ प्रो टीपी चतुर्वेदी का। विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रिका को उन्होंने यह जानकारी दी। बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 1987 से शुरू किया गया था । यह हर साल 31 मई को मनाया जाता है।

सहज उपलब्धता और किफयती है ये नशा
प्रो चतुर्वेदी के अनुसार तंबाकू की उपलब्धता प्रत्येक जगह होने व सस्ती दर की वजह से प्रायः हर कोई इसका इस्तेमाल करने लगता है। सरकार राजस्व के लिए इस पर प्रतिबंध नहीं लगाती है। दूसरी ओर वही सरकार एक अनुमान के अनुसार साढ़े चार हजार करोड़ से भी ज्यादा उपरोक्त रोगों के इलाज के लिए खर्च करती है। इससे सरकार की अदूरदर्शता प्रकट होती है। तंबाकू मुख्यतया सिगरेट या बीड़ी के धूम्रपान द्वारा उपयोग किया जाता है या गुटका, पान, खैनी, सुंघनी मंजन के माध्यम से उपयोग होता है।

मुख में सफेद दाग है कैंसर का शुरूआती लक्षण
मुख में सफेद दाग या अल्सर जो कि मुख कैंसर के शुरूआती लक्षण हो सकते है। सफेद दाग को लाइकेन प्लैनेस, ल्यूकोप्लेकिया भी कहते है। कभी कभी यह लालिमा लिए हुए भी हो सकता है। इससे कहीं ज्यादा मुख के कैंसर के रोगी भी आते हैं जिनका संबंध कहीं न कहीं तंबाकू सेवन से जुड़ा होता है। प्रायः नए उम्र के विद्यार्थी सबम्यूकस फाइब्रोसिस जिसमें मुंह का खुलना कम हो जाता है, को लेकर आते है। इससे भी मुंह के कैंसर की शुरूआत हो सकती है। मुख कैंसर एक अति प्रबल कैंसर रोग है साधारणतया इस रोग से प्रत्येक आठ में से एक रोगी की मृत्यु हो जाती है। इतना ही नहीं यह एक आश्चर्यजनक सत्य है कि इस समय कैंसर के रोगी होने में विश्व में भारत का प्रथम स्थान है, यानी विश्व में मुख कैंसर रोग का मुख्य कारण तंबाकू का सेवन है। विभिन्न शोध के आंकड़ों के आधार पर लगभग 80-85 प्रतिशत मुख कैंसर रोग तम्बाकू, पान, खैनी, सुंघनी मंजन, बीड़ी, सिगरेट आदि के सेवन से हो रहा है।

भारत में मुख कैंसर रोगियों की तादाद बढ़ रही
भारत में प्रतिवर्ष लगभग 80,000 रोगी मुख कैसर के होते थे जो अब बढ़कर आंकड़ा प्रति वर्ष एक लाख से भी अधिक हो गया है। फलतः इस समय भारत में मुख कैंसर के रोगियों की संख्या लगभग 30 लाख से भी अधिक है। आंकड़ों के आधार पर प्रतिदिन लगभग 2200 मृत्यु तंबाकू के सेवन से संबंधित है। पहले यह रोग लगभग 40 वर्ष की आयु या उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों में पाया जाता था लेकिन अब यह दृश्य बदल गया जिसमें नौजवानों अर्थात 35 वर्ष की कम आयु के लोगों में भी मुंख का कैंसर पाया जाने लगा है। इसकी खास वजह गुटखा, बीड़ी, सुपारी एवं सिगरेट आदि का सेवन है।

मुख कैंसर का जल्दी पता नहीं चलता
आम जनता को तंबाकू से होने वाले अवस्थाओं / रोगों एवं लक्षणों की जानकारी कम व नहीं होती है, जिसके कारण वे देर से चिकित्सकों के पास पहुंचते है। इससे ये अवस्थाएं, मुख कैंसर में परिवर्तित हो जाती है। यदि आरंभिक अवस्था में ही रोगी की जांच एवं इलाज किया जाय तो कैंसर की स्थिति आने से पूर्व ही उसे रोका जा सकता है। हालांकि कैंसर का उपचार कठिन है। फिर भी यदि यह रोग प्रारम्भिक स्तर पर ही पकड़ में आ जाए तो इसका प्रभावी उपचार चिकित्सकों द्वारा किया जा सकता है जिसके लिए चिकित्सक सतत् प्रयत्नशील है। फेफड़े के कैंसर का मुख्य कारण केवल धूम्रपान है। गांव में लोग बीड़ी का उपयोग धूम्रपान के लिए करते है, जो कि और ज्यादा खतरनाक है। बीड़ी या सिगरेट के धएं में और कई खतरनाक पदार्थ या गैस जैसे सीसा, कार्बन मोनो आक्साईड, फार्मेल्डिहाईड, अमोनिया, साइनाइड आदि पदार्थ पाए जाते है जो कि शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाते है।

दृढ़ इच्छा शक्ति से मिल सकती है मुक्ति
तम्बाकू से होने वाले रोगों से बचाव केवल इसकों न उपयोग करके किया जा सकता है। इसमें आदमी की अपनी दृढ़ इक्षाशक्ति का बहुत बड़ा योगदान होता है। सरकार एवं सामाजिक संगठनों को और तेजी से तम्बाकू के उपयोग को रोकने की दिशा में और काम करने की जरूरत है।

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