
World Sparrow Day
वाराणसी। 'बचपन में एक चिड़िया हुआ करती थी, जिसकी आवाज से हमारे दिन की शुरुआत होती थी, वो कहां गयी ? मन अक्सर ये सवाल करता है। यह सवाल आज पूरे देश के लिए अहम हो गया है कि आखिर घर, आंगन और छत पर इधर-उधर फुदकती और चहचहाती हुई गौरेया आखिर कहां गयी। इनके वजूद पर अब खतरा मंडरा रहा है, लेकिन काशी के इंद्रपाल सिंह बत्रा इन्हे संरक्षित करने में लगे हैं। इनका घर इन गौरेयों के लिए आशियाना बना हुआ है।
इंद्रपाल सिंह बत्रा ने आखिर कैसे इन गौरेया को संरक्षित करने और उनके लिए अपने घर में आशियाना बनाने की सोची। इस सब पर patrika.com ने इंद्रपाल सिंह से बात की।
पेड़ कटने से शुरू हुआ गौरैया संरक्षण का सफर
इंद्रपाल सिंह बत्रा ने बताया कि 20 पहले घर के सामने एक पेड़ हुआ करता था। उसे काट दिया गया। इस पेड़ पर गौरैया का आशियाना था। इसके बाद गौरैया हमारे घर पर आने लगीं जिसे देख इनके लिए अपने घर में पहले एक छोटी सी जगह बनाई और इनके लिए दाने-पानी का इंतजाम किया और फिर धीरे-धीरे पूरे घर में इनकी आवजाही होने लगी।
बैगनवेलिया और शमी का लगवाया पेड़
इंद्रपाल ने बताया कि पहले इन्हे अपने घर में दाना-पानी दिया और फिर अपने मकान में बैगनवेलिया और शमी के पौधे लगवाए। ये पेड़ जब बड़े हो गए तो दीवारों पर दर्जनों गमलों को प्लास्टर ऑफ पेरिस से उल्टा चिपका कर घोसला बनवाया और जगह-जगह घर में रुई और कपडे के टुकड़े रखे. कुछ ही दिनों में चिड़िया इन्हे ले जाकर अपना घोसला गमलों में बनाने लगीं। अब सुबह के समय बाहर निकलने वाले इनके झुंड को देखने के लिए लोग टकटकी लगाए रहते हैं।
घर में हैं 150 घोसले
इंद्रपाल ने बताया कि हमने इनके रहने के लिए घर में ही पत्थर और गमलों से घोसले बनाये जिसमे ये अण्डे देती हैं और बच्चे पैदा करती हैं। इस समय उनके घर में 150 घोसले हैं और रोजाना सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच उनके घर में हजारों की संख्या में गौरेया दाना चुगने आती हैं। इसके अलावा दिन भर बच्चों की मां आती जाती रहती हैं। इंद्रपाल ने बताया कि रात में भी एक बार चिड़ियों को दाना डाला जाता है।
एसी ने छीना इनका आशियाना
इंद्रपाल सिंह ने कहा कि पहले के घरों में रौशनी और हवा जाने के लिए रौशनदान बनाये जाते थे। इन रौशनदानों में गौरेया आराम से घोसला बनाकर रहती थी। समय का चक्र बदला और लोगों ने अपने घरों में एसी लगवाना शुरू कर दिया। इससे रौशनदान और खिड़कियां अब घरों से खत्म हो गयी हैं। इसके आलावा लोग पेड़ों का कटान भी नहीं रोक रहे हैं। इसलिए गौरिया की संख्या कम होती जा रही है। हमारे मोहल्ले में मेरे बाद अब कई लोग गौरेया को दाना-पानी दे रहे हैं।
बेटी और पत्नी देते हैं साथ
इंद्रपाल की पत्नी सोनिया बत्रा और बेटी अमृता बत्रा भी उनके इस कार्य में सहयोग करते हैं। बेटी अमृता बत्रा ने बताया कि बचपन से मैंने घर में गौरेया देखी है। पापा से कभी किसी खिलौने की जिद नहीं की क्योंकि हमेशा मेरे कमरे, स्टडी रूम और यहां तक की जहां भी घर में जाती हूं ये खूबसूरत पंक्षी मेरे साथ रहते हैं। सुबह इनकी ही आवाज सुनकर होती है। अमृता ने कहा कि ये चिड़िया जब मै घर में रहती हूं तो मेरे आस-पास मंडराती हैं और मेरे कंधे और हथेली पर बैठती हैं।
PM मोदी कर चुके हैं मन की बात में तारीफ
काशी के इंद्रपाल सिंह की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं। रविवार 28 मार्च को जारी हुए टेलीकास्ट में उन्होंने इंद्रपाल सिंह सराहा था और देशवासियों से गौरेया संरक्षण की बात कही थी। वहीँ इंद्रपाल सिंह ने भी सभी से अपने घरों में सिर्फ गर्मी में नहीं बल्कि हमेशा दाना और पाने रखने की बात कही ताकि साल भर गौरेया उनके घर पर आये और यह नन्ही से जान विलुप्त न होने पाए।
Updated on:
20 Mar 2023 10:56 am
Published on:
20 Mar 2023 10:29 am
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