अहमदाबाद शहर के असारवा स्थित सिविल अस्पताल ने अंगदान के क्षेत्र में मानवता की एक अनमोल मिसाल पेश की। अस्पताल में पांच वर्ष 87 दिनों में 1000 अंगों और पेशियों का दान प्राप्त करने का अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित हुआ है। हाल ही में छोटा उदेपुर जिले के संखेडा के 60 वर्षीय रमेश तडवी (60) के ब्रेनडेड घोषित किए जाने पर उनके परिवार ने अपनी व्यक्तिगत त्रासदी को एक सामूहिक उपकार में बदलने का निर्णय किया। उनके इस निर्णय से एक लीवर, दो किडनी और दो आंखें प्राप्त हुईं।अहमदाबाद सिविल अस्पताल का अंगदान कार्यक्रम 27 दिसंबर 2020 से शुरू हुआ था। इस अवधि में अब तक 1000 अंगों और पेशियों का दान प्राप्त किया गया, जिसमें 767 अंग और 233 पेशियां (आंख व त्वचा) शामिल हैं। इन अंगों ने 745 से अधिक लोगों को नया जीवन दिया, जिससे हर परिवार में एक नई उम्मीद की किरण जागी।
किडनी का दान सबसे ज्यादा
अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, 232 ब्रेन डेड और 86 मृत दाताओं के अंग और पेशियों का दान किया गया। ब्रेनडेड दाताओं के जहां किडनी लिवर आदि का दान किया जाता है वहीं मृत दाताओं के भी त्वचा, आंख और किडनी का दान किया गया। इस दान में सबसे अधिक 427 किडनी, 206 लीवर और 192 आंखें शामिल हैं। इसके अलावा, 73 हृदय, 41 त्वचा, 34 फेफड़े, 19 पेंक्रियाज, 6 हाथ और 2 आंतें भी दान की गईं।
दाताओं में 177 पुरुष व 55 महिलाएं
अंगदाताओं में कुल 177 पुरुष और 55 महिलाएं शामिल हैं। 41 से 60 वर्ष आयु वर्ग के सबसे अधिक 90 दाता हैं। इसके अलावा 13 से 25 वर्ष के दाताओं की संख्या 44 रही। सिविल अस्पताल ने कई विशेष रिकॉर्ड भी स्थापित किए हैं, जैसे कि गुजरात का पहला हाथ दान, पहली छोटी आंत का दान, एक ही दिन में तीन अंगदान, और लगातार छह दिनों में छह अंगदान।एक जीवन से दूसरे जीवन तक की पवित्र यात्रा
अंगदान सिर्फ एक शारीरिक दान नहीं है, यह एक जीवन से दूसरे जीवन तक की पवित्र यात्रा है। अहमदाबाद सिविल अस्पताल आज अंगदान के क्षेत्र में देश में अव्वल है। अगर समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ेगी, तो भविष्य में कोई भी मरीज अंगों की कमी के कारण अपना जीवन नहीं खोएगा। अंगदान हमें यह सिखाता है कि संकट की घड़ी में भी एक संवेदनशील और निस्वार्थ निर्णय से कितनी जिंदगियां बदल सकती हैं।
डॉ. राकेश जोशी, चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल