SC rejects zakia jaffri plea against SIT clean chit to Modi in 2002 Gujarat riots case
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के मामले में एसआईटी की ओर से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ जाकिया जाफरी की अपील याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ए एम खानविलकर की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट एसआईटी रिपोर्ट को स्वीकार करने और विरोध याचिका को खारिज करने के मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को बरकरार रखती है। इस अपील के मेरिट में अभाव है इसलिए याचिका खारिज की जाती है।
इससे पहले मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने गत वर्ष 9 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। जाकिया ने एसआईटी के क्लीन चिट दिए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसाइटी में भडक़े दंगे में जाकिया जाफरी के पति व पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे।
वर्ष 2012 में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन सीएम मोदी सहित 64 लोगों को क्लीन चिट दी थी। जाफरी ने इस रिपोर्ट को अहमदाबाद की मजिस्ट्रेट अदालत में चुनौती दी थी। मजिस्ट्रेट अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। जाफरी ने वर्ष 2014 में निचली अदाल के फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2017 को जाकिया की अर्जी खारिज कर दी थी। फिर वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। इसमें जाकिया ने गुजरात दंगों में व्यापक षडयंत्र को लेकर जांच की मांग भी की थी।
जाकिया की ओर से कपिल सिब्बल ने मामले में व्यापक साजिश का आरोप लगाया। इस मामले की छानबीन में एसआईटी ने काफी खामियां की है और अहम साक्ष्य को नजरअंदाज किया। साथ ही सही तरह से मामले की छानबीन नहीं की।
उधर एसआईटी ने दलील दी थी कि इस मामले में गहन छानबीन हुई और मामले में किसी को बचाया नहीं गया। कुल 275 लोगों का परीक्षण हुआ था और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे कि इस मामले में व्यापक साजिश की बात सामने आई हो। एसआईटी ने कहा था कि गुजरात दंगे में व्यापक साजिश का कोई साक्ष्य नहीं है।
वहीं गुजरात सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि जाकिया जाफरी के नाम पर सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात दंगे के मामले को गर्म रखना चाहती हैं। इस मामले में सुनवाई हो चुकी है और मेरिट के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया गया था या फिर वे बरी किए जा चुके हैं।
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