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अहमदाबाद

साइबर ठगी में लिप्त था सहकारी बैंक का निदेशक, हुआ गिरफ्तार

शेयर बाजार में निवेश पर अच्छे मुनाफे का झांसा देकर ठगे थे 83 लाख, सहकारी बैंक के 192 खातों का उपयोग

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अहमदाबाद. शेयर बाजार, आईपीओ में निवेश करने पर अच्छा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर शहर निवासी एक बुजुर्ग को 83.56 लाख की चपत लगाने के मामले में पहली बार एक सहकारी बैंक के निदेशक की लिप्तता का खुलासा हुआ है। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने इस निदेशक सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है।साइबर क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) हार्दिक मांकडिया ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों में तेलंगाना के हैदराबाद के चिंतलकुंटा सदगुरुनगर निवासी वेंकटेश्वरलु उर्फ वेंकी समुद्रला (52) और तेलंगाना हैदराबाद नल्लाकुंटा निवासी स्वामी अय्यप्पा नरावुल्ला (42) शामिल हैं। इसमें से आरोपी स्वामी अय्यप्पा नरावुल्ला 10वीं तक पढ़ा है और 2017 में आर्मी से सेवानिवृत्त हुआ है। तीन साल से स्टॉक मार्केट और क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग का काम करता है।

आरोपी वेंकटेश्वरलु उर्फ वेंकी हैदराबाद में स्थित श्रीनिवासा पद्मावती को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक का 20 साल से निदेशक है। साइबर ठगी में इसकी लिप्तता भी सामने आई है, जिससे इसे गिरफ्तार किया है। ये एमकॉम तक पढा है। 18 सालों से क्रिप्टो करेंसी, ब्रोकिंग, शेयर मार्केट, कमोडिटी मार्केट का काम करता है। लोगों को क्रिप्टो करेंसी सिखाता है।मांकडिया ने बताया कि अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच में एक बुजुर्ग ने शिकायत दी, जिसमें बताया कि उन्हें अज्ञात वॉट्सएप मोबाइल नंबरों से शेयर मार्केट में निवेश करने की जानकारी मिली।

एक लिंक के जरिए उन्हें ग्रुप ग्लोब कैपिटल-15 में जोड़ा गया। इसमें आईपीओ और ब्लॉकडील की जानकारी दी गई और ग्लोबईएसईएसएलटीडी एप्लीकेशन डाउनलोड कराई गई। जिसमें बैंक अकाउंट, आधारकार्ड, पानकार्ड की जानकारी, फोटो अपलोड कराया गया। निवेश करने पर अच्छे मुनाफे का झांसा देकर उन्होंने निवेश दिया तो उनकी राशि ऑनलाइन सात करोड़ रुपए मुनाफे के साथ दिखाई गई। उनसे अलग-अलग खातों में 83.56 लाख रुपए जमा कराए, जब बुजुर्ग ने रुपए निकालने की बात कही और कोशिश की तो रुपए नहीं निकले। जिससे ठगी का अहसास हुआ और शिकायत दर्ज कराई।

कंबोडिया के गिरोह की लिप्तता, 5-10 प्रतिशत कमीशन पर काम

प्राथमिक जांच में सामने आया कि शेयर बाजार में निवेश पर मुनाफे का झांसा देकर ठगी करने वाला गिरोह कंबोडिया से ऑपरेट हो रहा था। इस गिरोह के लिए हैदराबाद निवासी स्वामी अय्यप्पा और वेंकटेश्वरलु काम करते थे। दोनों को पांच से 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। ठग गिरोह ठगी का पैसा सबसे पहले एक डमी अकाउंट में जमा कराते फिर श्रीनिवासा पद्मावती को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक के उस खाते में जमा कराते जिसमें वेंकटेश्वरलु कहता था। ये बैंक के 109 बैंक अकाउंट धारकों को क्रिप्टो ट्रेडिंग करने पर मुनाफे का झांसा देकर उन्हें बताए उनके खाते का उपयोग ठगी की राशि को क्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी में बदल देता और ठग गिरोह के सदस्यों को चीन व कंबोडिया भेज देता था। तीन साल पहले स्वामी अय्यप्पा टेलीग्राम लिंक के जरिए चाइना गिरोह के सदस्य से संपर्क में आया था। ये और वेंकटेश्वरलु एक साल से मिलकर ठगी कर रहे थे। स्वामी अय्यप्पा पहले भी पकड़ा जा चुका है। इसे ट्रांसफर वारंट के जरिए इस मामले में भी पकड़ा है।

देशभर में 12 सौ मामले, अहमदाबाद के 5 का खुलासा

मांकडिया ने बताया कि इस गिरोह के विरुद्ध इस बैंक के अकाउंट का उपयोग कर क्रिप्टो करेंसी में रुपए कन्वर्ट कर विदेश भेजने और ठगी करने के 1182 मामले साइबर क्राइम हेल्पलाइन पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इसमें से पांच मामले अहमदाबाद के भी हैं। एक मामला सूरत का भी है। जिसमें दो करोड़ की ठगी में से 40-50 लाख इस बैंक के अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे।