4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अजमेर

बैसाखी से थक चुकी है मंजू, अब ट्राइसाइकिल के लिए भटक रही

ट्राइसाइकिल मिले तो खुद का काम खुद करने का जज्बा

Google source verification

चन्द्र प्रकाश जोशी
अजमेर. बैसाखियों के सहारे धूप में दफ्तरों के चक्कर काटती नि:शक्त महिला की हिम्मत टूट गई। एक ओर चलने-फिरने में परेशानी दूसरी ओर 38 डिग्री पारा से सांसें फूल गई। एक से दूसरे दफ्तर में पहुंच कर ट्राइसाइकिल के लिए फरियाद करती महिला की उम्मीद जब पूरी होते नहीं दिखी तो फफक-फफक कर रो पड़ीं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक कार्यालय में ट्राई साइकिल की उम्मीद लेकर पहुंची बरेव निवासी महिला मंजू देवी (60) ने अपना निशक्तता प्रमाण पत्र दिखाकर उसे ट्राई साइकिल दिलाने की फरियाद लगाई। जिम्मेदारों ने ट्राई साइकिल का काम चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं होने का हवाला दिया। मगर किसी ने यह जहमत नहीं उठाई कि वह कहां संपर्क करे, किससे मिले…? ताकि उसे ट्राई साइकिल मिल सके। बाद में उसने अन्य दफ्तरों में भी पहुंचकर पीड़ा बताई। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग से नि:शक्तता प्रमाण पत्र भी जारी हो रखा है।
परेशानी हगळी, पानी पिलाबाळो भी कोई नी है म्हारे
अश्रुधार पोंछती मंजू देवी ने अपनी भाषा में बताया कि परेशानी हगळी (सभी) हैं, घर में कोई पानी पिलाबाळो (पिलाने वाला) कोई नहीं है। हर काम उसे ही करना पड़ता है। कहीं बैसाखी से लम्बी दूरी पर चला नहीं जाता है। अगर ट्राईसाइकिल मिल जाए तो उसके खुद के काम वह कर सके। उसने देवर-जेठ पर भी झगड़ा कर घर से बाहर निकालने की बात कही।