28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अजमेर
आध्यात्मिक पदयात्रा से होगी धार्मिक पुष्कर मेले की शुरुआत
Play video

आध्यात्मिक पदयात्रा से होगी धार्मिक पुष्कर मेले की शुरुआत

कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत ने पर्याप्त जलापूर्ति, खाद्य पदार्थों की सेंपलिंग के दिए निर्देश
Follow Patrika on Google News
Google source verification

अजमेर

•

image

Tarun Kashyap

•

Updated: 16 Oct 2024, 1:00 AM IST

पुष्कर.होटल सरोवर में मंगलवार को कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत के मुख्य आतिथ्य एवम जिला कलक्टर लोक बंधु की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने मेला आयोजन की तैयारियों की जानकारी दी। पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.सुनील घीया ने मेला मैदान में दो नवम्बर से पशुपालकों के लिए व्यवस्थाएं शुरू करना बताया। परिषद आयुक्त कीर्ति कुमावत ने सड़क, सफाई, रोशनी, फ़ूड पैकेट, बेरिकेडिंग आदि कार्यों की प्रगति रिपोर्ट दी।

बताई समस्याएं

पार्षद जय नारायण ने सीवरेज के पानी की समस्या, अरुण पराशर ने घाटों पर जलस्तर अधिक रहने के कारण गोताखोर, सिविल डिफेंस की अतिरिक्त व्यवस्था, बस व्यवस्था के साथ मेले के लिए पांच करोड़ का अतिरिक्त बजट देने की मांग की। जगदीश कुर्डिया ने पशुपालकों के लिए पर्याप्त बिजली व्यवस्था नहीं होने, रेतीले धोरे मिट्टी का अवैध खनन कर खत्म करने की शिकायत की।

पर्याप्त जल वितरण करें

कस्बे में 96 घंटे के अंतराल में जलापूर्ति पर रावत ने पर्याप्त जल वितरण के निर्देश दिए। रावत ने घाटी में झाड़ियां हटाने, दीवारों की मरम्मत, मुख्य प्रवेश द्वार, खाद्य पदार्थों की सेंपलिंग सहित आवश्यक निर्देश दिए। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अजय शर्मा ने सांस्कृतिक आयोजनों की जानकारी दी।

चर्चा के दौरान मंत्री रावत ने एंट्री प्लाजा में कार्यक्रम कराने का सुझाव दिया। रघु पारीक ने भी सुझाव दिए। खास बात तो यह रही कि इस बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक, नगर परिषद सभापति कमल पाठक, अर्जुन सिंह रावत सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी, पुरोहित व कस्बेवासी मौजूद रहे।

12 नवम्बर को आध्यात्मिक पदयात्रा

कार्तिक मास की एकादशी मंगलवार 12 नवम्बर को गुरुद्वारा से मुख्य बाजार होते हुए मेला मैदान तक आध्यात्मिक पद यात्रा के साथ धार्मिक पुष्कर मेले की शुरुआत करने का निर्णय लिया गया। इसमें बैण्डबाजों, झांकियों, संत-मंहतों पर पुष्पवर्षा की जाएगी। पहले यह यात्रा कई वर्षों से गुरुद्वारे के पीछे से मंदिर तक निकाली जाती रही है।