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स्मृति ईरानी डिग्री मामलाः कांग्रेस ने की नामांकन रद्द करने की मांग, फिर आया यह कारार जवाब

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जिनकी शैक्षणिक योग्यता ने पांच साल पहले एक बड़े विवाद को जन्म दिया था, उसने इस चुनावी मौसम में एक नया मोड़ ले लिया है।

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अमेठी. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जिनकी शैक्षणिक योग्यता ने पांच साल पहले एक बड़े विवाद को जन्म दिया था, उसने इस चुनावी मौसम में एक नया मोड़ ले लिया है। अमेठी में दाखिल किए गए नामांकन पत्र में यह साफ हो गया है कि स्मृति ईरानी ने ग्रेजुएशन कोर्स पूरा नहीं किया है। वह केवल 12वीं पास हैं। हलफनामे में कहा गया है कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम के लिए दाखिला लिया था, लेकिन इसे पूरा नहीं किया। अमेठी में इसको लेकर लोगों में कोई खास प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिल रही है, लेकिन सियासी गलियारों में खूब चर्चा है। विपक्ष ने एक बार फिर स्मृति की शैक्षिक योग्यता पर सवाल तो उठाए ही हैं, देश से झूठ बोलने का भी आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर भी फर्जी डिग्री मामले में खूब प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने चुनाव आयोग से स्मृति के नामांकन रद्द करने की मांग की है। इसके जवाब में स्मृति ईरानी ने कहा कांग्रेस जितना मुझे अपमानित करना चाहे, करे लें, लेकिन गांठ बांध ले हिंदुस्तान के सामान्य परिवार की महिला एक बार जब ठान लेती है तो जब तक लक्ष्य तक नहीं पहुंचती है, तब तक दम नहीं लेती है।

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कांग्रेस का हमला-

एमएलसी दीपक सिंह ने फर्जी भारतीय जनता पार्टी की फर्जी कहानियां रोज चर्चा में रहती हैं। अब इनके प्रधान चौकीदार के फर्जी डिग्री के बाद इनकी सबसे प्रिय मंत्री स्मृति ईरानी जी ने भी दोहरा चरित्र दिखाया है। 2014 के नामांकन में ये बीए पास थीं, अब नामांकन में उन्होंने केवल बी.काम प्रथम वर्ष की बात ही बताई है। यह फर्जीवाड़ा है। भाजप की जो संस्कृति फर्जीवाड़े वाली रही है। उसको स्मृति ईरानी जी ने चरितार्थ किया है। मुझे लगता है इनकी दोनों डिग्रिया फर्जी हैं। वहीं कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से लिखित शिकायत कर फर्जीवाड़े व घोटाला करने वाले मंत्रियों के नॉमिनेशन प्रकिया को निरस्त करने की मांग की है।

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क्योंकि मंत्री कभी ग्रेजुएट थी-

कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर स्मृति पर निशाना साधा और कहा कि एक नया सीरियल आनेवाला है जिसका शीर्षक ‘क्योंकि मंत्री भी कभी ग्रैजुएट थी’ होगा। वहीं इसकी ओपनिंग लाइन होगी- ‘क्वॉलिफिकेशन्स के भी रूप बदलते हैं, नए-नए सांचे में ढलते हैं, एक डिग्री आती है, एक डिग्री जाती है, बनते नए ऐफिडेविट हैं।’

स्मृति का जवाब-

स्मृति ईरानी ने इस मामले में कहा है कि बीत पांच वर्षों में एक ऐसा अपमान नहीं, एक ऐसी गाली नहीं, एक ऐसा षडयंत्र, एक ऐसी निरलज व्यवहार नहीं जो कांग्रेस के चेले चपाटों ने न किया हो। उनका गुस्सा मात्र इसलिए है कि कि मैंने अमेठी में नामदार को चुनौती दी है। चेले चपाटों से कहना चाहूंगी कि हिंदुस्तान के सामान्य परिवार की महिला में इतना दम खम है कि वो नामदारों को टक्कर भी दे सकती है और हरा भी सकता है। नामदार अभी दूसरी सीट पर पहुंचे हैं। उनकी परमानेंट इस सीट से हार 13 मई को सुनिश्चित हो जाएगी। कांग्रेस के जितने चेले चपाटे मुझे अपमानित करना चाहे, उन्हें खुली छूट है। लेकिन गांठ बांध ले हिंदुस्तान के सामान्य परिवार की महिला एक बार जब ठान लेती है तो जब तक लक्ष्य तक नहीं पहुंचती है, तब तक दम नहीं लेती है।

क्षेत्र में नहीं बन पाया मुद्दा-

सियासी गलियारों में भले ही स्मृति ईरानी की डिग्री का मामला चर्चा में हो, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया है। स्थानीय लोगों से चर्चा करने पर पता चला कि उनके लिए विकास मुद्दा है। फर्क नहीं पड़ता कि किसी ने डिग्री हासिल की हो या न की हो। लोगों का यह मानना है कि जो क्षेत्र में विकास कराएगा उसे ही वोट जाएगा।