आजमगढ़. कहते हैं कि इरादे नेक हों और कुछ करने की ईच्छाशक्ति हो तो व्यवस्था को बदलने में देर नहीं लगती। राज्य अध्यापक पुरस्कार हासिल करने वाले जिले के प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर के प्रधानाध्यपक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने इसे साबित कर दिखाया है। आज यह प्राथमिक विद्यालय पब्लिक स्कूलों से कहीं आगे है। यहां के लोग अपने बच्चों को पब्लिक स्कूल में भेजने के बजाय परिषदीय विद्यालय में भेजना ज्यादा पसंद करते हैं। खास बात है कि सुरेंद्र सिंह ने स्कूल में ज्यादातर कार्य जन सहयोग से कराया है और उनका विद्यालय आज पूरे जिले के लिए मिशाल है। सुरेंद्र सिंह चाहते हैं कि जिले का हर परिषदय विद्यालय भैरवपुर विद्यालय से बेहतर हो। यही वजह है कि प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष पद पर काम करते हुए वे लगातार शिक्षकों को बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं।
मूलरूप से बूढ़नपुर तहसील क्षेत्र के बड़ा गांव निवासी सुरेंद्र प्रसाद सिंह पुत्र स्व. राजधारी सिंह की शिक्षा उसी प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर में हुई जहां आज वे प्रधानाध्यापक है। इनके गुरू व इसी विद्यालय के शिक्षक राम लखन सिंह को वर्ष 1975 में राज्यपाल पुरस्कार से सममानित किया गया था। उन्हीं की प्रेरणा से सुरेंद्र ने शिक्षक बनकर कुछ अलग करने का फैसला किया। इन्होंने हाई स्कूल व इंटर की शिक्षा कोयलसा इंटर कालेज व स्नातक तथा बीडीसी की शिक्षा कोयलसा डिग्री कालेज से प्राप्त की।
वर्ष 1993 में इन्हें सहायक अध्यापक के तौर पर नौकरी मिली। 13 दिसंबर 1993 को इनकी पहली पोस्टिंग प्राथमिक विद्यालय गंगापुर मोहम्मदपुर में हुई। वर्ष 1994 में इनका स्थानान्तरण सहायक अध्यापक पद पर ही कोयलसा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय धनघटा पर हुई। इसके बाद 1 जुलाई 2006 को इन्हें प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर को प्रधानाध्यापक बनाया गया। यहीं से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा भी हासिल की थी। यहां तैनाती के बाद अपने गुरू राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित राम लखन सिंह से प्रेरित होकर इन्होंने विद्यालयक का कायाकल्प शुरू किया।
वर्ष 2015 में इन्हें उप शिक्षा निदेशक लखनऊ दीपचंद से प्रोजेक्टर व पुस्कालय के लिए 2.5 लाख रूपये का सहयोग मिला। स्कूल में प्रोजेक्टर लगा और अच्छे पुस्तकालय को देख स्थानीय लोग प्रेरित हुए। ग्राम प्रधान रमाशंकर पांडेय ने लाउड स्पीकर तो ब्लाक प्रमुख महेंद्र यादव ने बैंडबाजे की व्यवस्था कर दी। जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह ने स्कूल के बच्चों को शुद्ध जल के लिए आरओ लगवा दिया। इसके बाद सुरेंद्र सिंह ने स्थानीय लोगों के सहयोग से स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए डेस्क व बेंच की व्यवस्था की। विद्यालय में शौचालय बनवाया और सौ से अधिक फलदार वृक्ष भी तैयार कर डाले।
देखते ही देखते यह विद्यालय पब्लिक स्कूलों को टक्कर देने लगा।वर्ष 2015-16 में उत्कृष्ट कार्य के लिए सुरेंद्र प्रसाद सिंह को विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सुरेंद्र प्रसाद सिंह का सपना है कि उनके स्कूल में पढ़ने वाला हर बच्चा बेहतर मुकाम हासिल करे। यहीं वजह है कि सुरेंद्र सिंह ने व्यायाम शिक्षक का डिप्लोमा हासिल किया तो स्काउट मास्टर में एडब्ल्युबी प्रशिक्षण हासिल किया। अपने शिक्षा काल में खुद सुरेंद्र प्रसाद सिंह वालीबाल के अच्छे प्लेयर रहे। इसके स्कूल के कई बच्चे एथेलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं।
सुरेंद्र प्रसाद सिंह कहते हैं कि शिक्षक का यह नैतिक दायित्व होता है कि वह बच्चों के भविष्य का निर्माण करे। वह पूरी ईमानदारी से अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे है। हर शिक्षक को ऐसा करना चाहिए। प्राथमिक शिक्षा बच्चों की नींव होती है। यह जितनी बेहतर होगी बच्चे का भविष्य उतना ही अच्छा होगा। वे शिक्षण कार्य के साथ ही प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी निभा रहे। बतौर अध्यक्ष वे संगठन से जुड़े शिक्षकों को इसके लिए प्रेरित भी करते हैं। उनका कहना है कि राज्य शिक्षक पुरस्कार पाकर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे है। यह पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। हर शिक्षक को यह पुरस्कार प्राप्त करने के लिए अच्छा कार्य करने की जरूरत है। जब प्रतिस्पर्धा होती तो शिक्षा का स्वरूप खुद बखुद बदल जाएगा।