
जमवारामगढ़. आधा सावन बीतने के बाद भी रामगढ़ बांध अब तक रीता है। बाणगंगा नदी पर अरावली की पहाड़ियों के पास जमवारामगढ़ के पास सवा सौ वर्ष पहले बनाया गया रामगढ़ बांध 19 वर्ष से सूखा है। बाण गंगा नदी एक बार भी नहीं बही है। रोडा नदी में दो बार पानी की आवक हो चुकी है, लेकिन यह पानी भी सीरों का बांस से आगे नहीं पहुंचता है। अभी तक की गांवों के ताल, तलैया, जोहड़, तलाई, तालाब भी नहीं भरे है। रामगढ़ बांध का केचमेंट एरिया 297 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। बाणगंगा नदी का उद्गम क्षेत्र विराटनगर विधानसभा में मैड़ की पहाड़ियां हैं।
हमेशा बहने वाली थी बाण गंगा नदी
बाण गंगा सदा नीरा नदी यानी हमेशा बहने वाली नदी थी। केचमेंट एरिया में शाहपुरा से माधावेणी नदी आकर मिलती है। आमेर के दिल्ली रोड से सटे इलाके का गोमती नाला सहित अचरोल व चंदवाजी इलाके का पानी नदी नालों के माध्यम से बाणगंगा नदी में आता है। वहीं रोडा नदी जमवारामगढ़ के पास से होकर गुजर रही है।
250 एनिकट, तलाई-जोहड़
बांध के केचमेंट एरिया में छोटे मोटे 250 चेकडेम, एनिकट, तालाब, तलाई, जोहड़ व जल ढांचे हैं। बाणगंगा नदी सहित सभी सहायक नदियों एवं प्रमुख नालों पर अतिक्रमण है। बांध की पाळ के सामने पहाड़ियों पर चलने वाले झरनों के नदी नाळों की जमीन को आवंटित कर दिया है। रामगढ़ बांध के केचमेंट एरिया से अतिक्रमण हटाने के लिए जाने वाली टीम को भी अवैध कॉलोनी नजर नहीं आती है। फौरी कार्यवाही होने से नदी नालों बंद हैं। जिससे बांध में पानी नहीं पहुंच पा रहा है।