बालाघाट। प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना का काफी महत्व है। शास्त्रों में प्रदोष के व्रत की बड़ी महिमा बताई गई है। कहा गया है कि इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक विधि-विधान से जो भक्त करता है उसको जन्म-जन्मांतर के पापकर्मों से छुटकारा मिल जाता है।
उक्त विचार शहर के स्नेह नगर वार्ड 28 में प्रारंभ पांच दिवसीय शिव महापुराण में कथावाचक राजुल पांडे ने कहे। इस मौके पर सादगी के साथ शोभा यात्रा भी निकाली गई। शिव महापुराण के पहले दिन पं. राजुल पांडे ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव को अद्र्धनारीश्वर भी कहा गया है, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिव आधे पुरुष ही हैं या उनमें संपूर्णता नहीं। दरअसल, यह शिव ही हैं, जो आधे होते हुए भी पूरे हैं। इस सृष्टि के आधार और रचयिता यानी स्त्री-पुरुष शिव और शक्ति के ही स्वरूप हैं। इनके मिलन और सृजन से यह संसार संचालित और संतुलित है। दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। नारी प्रकृति है और नर पुरुष। प्रकृति के बिना पुरुष बेकार हंै और पुरुष के बिना प्रकृति। दोनों का अन्योन्याश्रय संबंध है।