बालाघाट. खंडहर में तब्दील होता स्कूल भवन, छूते ही झडकऱ नीचे गिरता प्लास्टर और छत से झांकती लोहे की सलाखें। यह हाल जिले के बैहर तहसील क्षेत्र के वनग्राम धीरी के माध्यमिक स्कूल के है। भवन को देखकर ही उसकी जर्जरता और दयनीय स्थिति का आंकलन लगाया जा सकता है। बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन को नया भवन स्वीकृत नहीं किया जा रहा है। हादसे की आशंका के मद्देनजर मजबूरन स्कूल प्रबंधन को सामुदायिक भवन में कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही है।
10 वर्ष पूर्व बना था भवन
स्थानीय ग्रामीणों की माने तो करीब 10 वर्ष धीरी में एम मात्र माध्यमिक स्कूल भवन बनाया था। समय बीतने के साथ ही सात वर्षो में ही स्कूल भवन जर्जर होते चले गया। समय-समय पर स्कूल प्रबंधन ने मरम्मती करण की मांग की। लेकिन आवंटन के अभाव में मरम्मती करण नहीं किया जा सकता है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि स्कूल भवन की छत को छूते ही प्लास्टर झडकऱ नीचे गिरता है। खिडक़ी, दरवाजे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। भवन इतना जर्जर हो गया है कि कब ढह जाए कहा नहीं जा सकता है। परिणाम स्वरूप अनहोनी से बचने सामुदायिक भवन में कक्षाएं लगानी पड़ रही है।
तीन वर्षो से कर रहे शिकायत
स्कूल प्रबंधन और पालकों ने बताया कि मरम्मती करण या नए भवन को पिछले तीन वर्षो से मांग की जा रही है। स्थानीय स्तर से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक जानकारी पहुंचाई जा चुकी है। लेकिन अब तक न तो मरम्मत के लिए राशि आवंटित की गई। न ही नया भवन स्वीकृत किया गया है। पालकों ने बताया कि वनग्राम धीरी के इस माध्यमिक स्कूल में करीब 150 आदिवसी परिवारों के बच्चे शिक्षणरत है। लेकिन आदिवासी को अपना हितैषी बताने वाला शासन प्रशासन मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
इस मामले में राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा के जिला अध्यक्ष अंकुश चौहान ने बताया कि स्कूल की दयनीय स्थिति को लेकर उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। वहीं स्थानीय विधायक को भी मामले की जानकारी दी गई। लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए हैं। अब उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठक कर स्कूल भवन की मांग को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। चौहान ने बताया कि संगठन के बेनर तले आगामी आंदोलन गढ़ी क्षेत्र में किया जाएगा। इसके पूर्व एक बार फिर ज्ञापन देकर जिला प्रशासन को अवगत कराया जाएगा।
वर्सन
स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो चुका है। हमने प्रशासन को प्रस्ताव भी दिया था। क्षेत्रीय विधायक को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया। लेकिन इतने गंभीर मामले को लेकर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हम हमने आंदोलन की रणनीति तैयार की है।
कमलेश मेरावी, ग्रामीण
बारिश के समय बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छत से पानी टपकता है। जर्जर भवन में बैठना दुश्वार हो जाता है। इस कारण ग्राम पंचायत सामुदायिक भवन में बच्चे 3 वर्षों से पढ़ रहे हैं।
प्रेमलता, ग्रामीण
स्कूल भवन की जर्जरता के कारण 150 आदिवासी बच्चे सामुदायिक भवन में शिक्षा अध्ययन कर रहे हैं। आदिवासियों के साथ इस का व्यवहार बर्दास्त नहीं किया जाएगा। हमने ग्रामीणों के साथ बैठक की है। 10 दिनों का प्रशासन को अल्टीमेटम दिया गया है। जल्द ही नया भवन स्वीकृत नहीं किया जाता तो आंदोलन किया जाएगा।
अंकुश चौहान, जिला अध्यक्ष राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा