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जिसे आपने देखा, न सुना, ऐसे लुप्त 130 पारंपरिक वाद्य यंत्रों से प्रस्तुति दे रहे ग्राम तवेरा के 14 युवा

छत्तीसगढ़ की लोक कला और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की विश्व में अलग पहचान है। गीत संगीत के बदलते व आधुनिकता के इस दौर में आने वाले पीढ़ी को शायद ही बड़ी संख्या में ये पारम्परिक वाद्य यंत्र न दिखे। लेकिन बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम तवेरा के युवाओं व बच्चों ने मिलकर लुप्त हो रहे पारंपरिक वाद्य यंत्रों को सहेजने का बीड़ा उठाया है।

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बालोद

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Satish Rajak

Apr 17, 2023

सतीश रजक/बालोद. छत्तीसगढ़ की लोक कला और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की विश्व में अलग पहचान है। गीत संगीत के बदलते व आधुनिकता के इस दौर में आने वाले पीढ़ी को शायद ही बड़ी संख्या में ये पारम्परिक वाद्य यंत्र न दिखे। लेकिन बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम तवेरा के युवाओं व बच्चों ने मिलकर लुप्त हो रहे पारंपरिक वाद्य यंत्रों को सहेजने का बीड़ा उठाया है। 14 लोगों की इस टीम के पास 130 से अधिक पारंपरिक वाद्य यंत्र हैं। इनसे सभी मिलकर विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देते हैं। संजू सेन की यह टीम कोरोना काल के बाद फिर से फार्म पर है। युवकों की इस पहल और सोच की तारीफ लोक गायिका रजनी रजक सहित कई कला के पुजारियों ने की है। जिला प्रशासन सहित संजू सेन को लखनऊ में राष्ट्रीय प्रतिष्ठा सम्मान से नवाजा जा चुका है। सेन समाज ने उन्हें समाज गौरव सम्मान से सम्मानित भी किया है।

 

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