19 जून 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बैंगलोर
संक्रमित की आंखों में देखने से नहीं, संपर्क में आने से फैलता है ‘पिंक आई’
Play video

संक्रमित की आंखों में देखने से नहीं, संपर्क में आने से फैलता है ‘पिंक आई’

Karnataka में 25 जुलाई से चार अगस्त के बीच कंजंक्टिवाइटिस (Pink Eye, Eye Flu) के 40 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। Bengaluru के विक्टोरिया स्थित मिंटो आई अस्पताल के छह चिकित्सक भी इस संक्रमण का शिकार हुए हैं

Google source verification

मानसून (monsoon) में कंजंक्टिवाइटिस (पिंक आइ, आंख आना, आई फ्लू) आम है, लेकिन इस बार यह लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के लिए भी परेशानी का सबब बना हुआ है।

Karnataka में 25 जुलाई से चार अगस्त के बीच कंजंक्टिवाइटिस (Pink Eye, Eye Flu) के 40 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। Bengaluru के विक्टोरिया स्थित मिंटो आई अस्पताल के छह चिकित्सक भी इस संक्रमण का शिकार हुए हैं। बीदर सर्वाधिक प्रभावित स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बीदर में सबसे ज्यादा 7693, हावेरी में 6558 और रायचूर में 6493 मामले दर्ज हुए। शिवमोग्गा में 3411, हासन में 1279, विजयनगर में 2200 और विजयपुर में 1843 लोग पीड़ित हुए।

संक्रामक रोग, सतर्क रहने की जरूरत

नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी के बारे में बढ़ती जागरूकता के साथ, पिछले महीने की तुलना में मामले थोड़े कम हुए हैं। हालांकि, हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए क्योंकि यह एक संक्रामक बीमारी हैं।

Dr. Solanki Eye Hospital के अध्यक्ष Dr. Narpat Solanki ने कहा कि कंजंक्टिवाइटिस होने पर आंखें लाल होने के साथ ही उसमें सूजन आ जाती है। यह बीमारी तब होती है, जब आंख के एक भाग कंजंक्टिवा में एलर्जी या संक्रमण (allergy or infection in the conjunctiva) के कारण सूजन हो जाती है। कंजंक्टिवाइटिस के प्रकार के आधार पर आंखों की ये बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकती है। डॉ. सोलंकी के अनुसार कंजंक्टिवाइटिस से बचाव के लिए कोई खास तरीका नहीं है क्योंकि कई स्रोत इसके कारण हो सकते हैं। बार-बार हाथों को धोना, आंखों को छूने या रगड़ने से बचना आदि कुछ सावधानियों को अपनाकर इस स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है। जिन लोगों में एलर्जी की समस्या होती है, उन्हें एलर्जिक रिएक्शन को बढ़ाने वाले पदार्थों से दूर रहना चाहिए। जो लोग धूल भरे वातावरण या आंखों में जलन पैदा करने वाली जगहों पर काम करते हैं, उन्हें आंखों को सुरक्षित रखने के उपाय अपनाने चाहिए।

पांच से 10 दिनों तक संक्रमण

नेत्र रोग विशेषज्ञ Dr. Pallavi Joshi ने बताया कि कंजंक्टिवाइटिस के मामले करीब 60 फीसदी बढ़े हैं। प्रारंभिक उपचार से कॉर्निया को बचाने सहित दृष्टि को प्रभावित करने वाली संभावित जटिलताओं को कम किया जा सकता है। कंजंक्टिवाइटिस किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ आंखों के संपर्क से नहीं फैलता है। हालांकि, मरीज की आंखों से स्राव कम-से-कम 5 से 10 दिनों तक संक्रामक हो सकता है। कंजंक्टिवाइटिस अधिकतर वायरल संक्रमण के कारण होता है।

मुख्य लक्षण

एक या दोनों आंखों का लाल होना, खुजली, डिस्चार्ज, पानी आना , आंख में कुछ फंसने जैसा महसूस होना और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता (photophobia) कंजंक्टिवाइटिस के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

संक्रमण के कारण

एलर्जी, वायरस बैक्टीरिया, आंख में रसायन का जाना, आंख में बाहरी वस्तु का जाना, नवजात शिशुओं में टियर डक का ब्लॉक होना।