बांसवाड़ा. जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले में शिक्षा के लिए संचालित छात्रावासों में अभावों का वास है। सरकार इन छात्रावासों में सुविधाओं के नाम पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, इसके बावजूद कई छात्रावासों की न तो दशा सुधर रही है और न ही व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है। हाल ही में जिला कलक्टर की ओर से कराई गई जांच में भी इसका खुलासा हुआ है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर छात्रावासों के नाम पर आ रहे बजट का कौन, कैसे व कहां दुरुपयोग कर रहा है। राजस्थान पत्रिका की इन्हीं तमाम हालात पर समाचार शृंखला ‘ छात्रावासों का सच ’ की पहली कड़ी-
ये देखो दुर्दशा- टैंकर के पानी से गुजारा
गढ़ी में जनजाति विभाग के बालिका आश्रम छात्रावास में चार बोरवेल खुदवाने के बावजूद पानी टैंकर से आ रहा है। छात्रावास में विभाग की ओर से तीन 250-250 फीट एवं विधायक मद से एक 500 फीट तक बोरवेल खुदवाए, लेकिन इनमें पानी ही नहीं आ रहा है। ऐसे में टैंकर से पानी मंगवाकर मोटर के जरिये टंकियों तक पहुंचाकर काम निकाला जा रहा है। इसके लिए बकायदा प्रति टैंकर सात सौ रुपए चुकाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि छात्रावास में 50 बालिकाएं अध्ययनरत हैं।
शक्करवाड़ा में चार दिन से दलिया
सज्जनगढ़. क्षेत्र में छात्रावासों में विद्यार्थियों को सुविधाएं नसीब नहीं हो रही है। बालिका छात्रावास शक्करवाड़ा में चार दिन से भोजन के नाम पर दलिया परोसा जा रहा है। बालिकाओं ने भी इसे स्वीकारा है। इसके अलावा बिस्तर भी मैले एवं पुराने है। छात्रावास में पड़ताल के दौरान वार्डन भी नहीं थी। बालक छात्रावास कसारवाड़ी में शुद्ध पेयजल का अभाव है। विद्यार्थियों ने बताया कि टैंकर से जो पानी आ रहा है वो पीने योग्य नहीं हैं। इधर, समाज कल्याण के बालिका छात्रावास सज्जनगढ़ में भी सुविधाओं का अभाव है।
सरेड़ी में जर्जरहाल छात्रावास
सरेड़ी बड़ी. कस्बे में संचालित टीएडी विभाग का आश्रम छात्रावास जर्जरहाल है। विद्यार्थी यहां मौत के साये में अध्ययन करने को मजबूर हैं। छात्रावास में 100 सीटें आवंटित की गई हैं। अधीक्षक लक्ष्मण लाल डिंडोर ने बताया कि बरसात में जर्जर छात्रावास में स्थितियां ज्यादा विकट हो जाती हंै। खस्ताहाल भवन को लेकर उच्चाधिकारियों को भी जानकारी दे दी है।छात्रावासों की फैक्टी फाइल
शिक्षा विभाग – 14
समाज कल्याण- 24
टीएडी – 74
कॉलेज स्तरीय छात्रावास – 4