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खेमा बाबा मेले में उमड़े श्रद्धालु, दर्शन पूजन कर खुशहाली की कामना की

सांपों के देवता के रूप में विख्यात खेमाबाबा के दर्शन-पूजन के लिए बाड़मेर-जैसलमेर के अलावा पूरे मारवाड़,गुजरात से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बायतु पहुंचे। मेला को लेकर मंदिर में प्रतिमाओं का विशेष पूजन व श्रृंगार किया गया। दिन निकलने के साथ ही आस पास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जयकारे लगाते, नृत्य करते हुए पैदल मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन-पूजन कर व प्रसाद चढ़ा परिवार में खुशहाली व रक्षा की कामना की। स्काउट्स ने लाइनिंग बनाने, पेयजल ,दर्शनार्थियों को शांतिपूर्ण तरीके से खेमाबाबा के दर्शन करवाने के रुप में सेवाएं दी। श्रद्धालुओं ने दुकानों व स्टालों पर जमकर खरीदारी की।

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सांपों के देवता के रूप में विख्यात खेमाबाबा के दर्शन-पूजन के लिए बाड़मेर-जैसलमेर के अलावा पूरे मारवाड़,गुजरात से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बायतु पहुंचे। मेला को लेकर मंदिर में प्रतिमाओं का विशेष पूजन व श्रृंगार किया गया। दिन निकलने के साथ ही आस पास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जयकारे लगाते, नृत्य करते हुए पैदल मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन-पूजन कर व प्रसाद चढ़ा परिवार में खुशहाली व रक्षा की कामना की। स्काउट्स ने लाइनिंग बनाने, पेयजल ,दर्शनार्थियों को शांतिपूर्ण तरीके से खेमाबाबा के दर्शन करवाने के रुप में सेवाएं दी। श्रद्धालुओं ने दुकानों व स्टालों पर जमकर खरीदारी की।

भोपा नृत्य आकर्षण का केन्द्र-मेले का मुख्य आकर्षण भोपा नृत्य रहा। मेले में सांकल-ताजणा लिए भोपों ने इन्हें पीठ पर मारते हुए नृत्य किया। भोपा ताजणा को एक-दूसरे की पीठ पर मारते हैं। सांकल लोहे की भारी भरकम , ताजणा सूत का रस्सा होता हैं। खेमा बाबा, गोगाजी के भजनों पर भोपा नृत्य करते हैं। इनके नृत्य को देखने के लिये दूरदराज से श्रद्धालु आते हैं।

जागरण में उमड़े श्रद्धालु-पूर्व रात्रि में आयोजित जागरण में गायकों ने लोक देवता सहित विभिन्न भजनों की प्रस्तुति दी।