बाड़मेर.शहर से कुछ किलोमीटर दूर बसे किसानों के खेत इन दिनों बदहाली की जीती-जागती तस्वीर बन चुके हैं। जिन खेतों में फसल लहलहाने का वक्त था, वहां अब बदबूदार गंदा पानी भरा है। शहर की सीवरेज व्यवस्था की नाकामी ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खड़ी फसलें नष्ट हो चुकी हैं और कई खेत बंजर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
शहर से निकलने वाला नाला कुछ दूरी बाद खत्म हो जाता है। इसके आगे बनी सीवरेज लाइन कई स्थानों पर जाम पड़ी है। नतीजा यह कि गंदा पानी खेतों की ओर मुड़ गया और देखते ही देखते खेत तालाब में तब्दील हो गए। जिन खेतों तक सीवरेज का पानी नहीं पहुंचा, वहां आज भी फसलें सुरक्षित और लहलहा रही हैं, जो साफ बताता है कि नुकसान की जड़ सीवरेज जाम है।
खेतों की डिग्गियां टूटी, ट्यूबवेल में दूषित पानी
इस मार्ग पर जीरे सहित कई फसलें बोई गई थीं। गंदे पानी के फैलाव से सात से अधिक खेत पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। किसानों ने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किए। जेसीबी और ट्रैक्टर से रेत डलवाई, मेड़ें बनाईं, बहाव रोकने की कोशिश की, लेकिन पानी का दबाव इतना अधिक था कि सभी उपाय बेअसर साबित हुए। कई खेतों की डिग्गियां टूट गईं और ट्यूबवेल तक में दूषित पानी घुस गया, जिससे सिंचाई व्यवस्था भी ठप पड़ गई।
नहीं हो रहा स्थायी समाधान
पत्रिका पड़ताल में सामने आया है कि यह है कि वर्षों से चली आ रही इस समस्या के बावजूद नगर परिषद आखिर क्यों समाधान नहीं कर पाई? करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नाले और सीवरेज का स्थायी इंतजाम नहीं होना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। हर साल किसान इसी त्रासदी को झेलते हैं और हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता।
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किसानों का दर्द: अब अपनी बात किसे बताएं?
खेत की डिग्गी टूट गई, पूरी फसल खराब हो गई। ट्यूबवेल में भी गंदा पानी आ गया। अब अपना दर्द किसको सुनाएं।- बालमसिंह, स्थानीय निवासी
– दो महीने से सीवरेज जाम है। शिकायतें कीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।- थानसिंह, स्थानीय निवासी
– हर साल यही होता है। जीरे की फसल खराब हो जाती है और मेहनत बेकार चली जाती है। – दातारसिंह, स्थानीय निवासी
– जेसीबी से रेत डलवाई, फिर भी पानी नहीं रुका। खेतों में वाहन तक नहीं निकल पा रहे। – यशपाल, स्थानीय निवासी
– अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आगे और बड़ा नुकसान तय है। – लोकेंद्रसिंह, स्थानीय निवासी
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