
बस्सी @ पत्रिका. जयपुर जिले के बस्सी, चाकसू एवं जमवारामगढ़ इलाके में मंगलवार को मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही गर्जना व बिजली चमकने के साथ ही कहीं बूंदाबांदी तो कहीं पर हल्की बरसात होने से मौसम खुशनुमा हो गया। वहीं बरसात रबी की फसलों में अमृत का काम कर गई। हालांकि मंगलवार सुबह बूंदाबांदी व बरसात होने से एक बार सर्दी का अहसास हुआ, लेकिन दोपहर बाद धूप खिलने के साथ ही मौसम साफ हो गया।
किसानों ने बताया कि इन दिनों तापमान बढ़ने के साथ ही रबी की गेहूं, जौ व चने की फसलों में पानी की मांग बढ़ गई थी। जिन किसानों के पास खेतों में फसलों की सिंचाई करने के संशाधन है, वे तो निरंतर अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन जिनके पास संशाधन नहीं है, वे मुंह ताक रहे थे। अब मंगलवार को कहीं बूंदाबांदी तो कहीं पर हल्की बरसात होने से फसल में सूख कम आएगी और फसलों की ग्रोथ भी बढ़ेगी।
चने व गेहूं में सर्वाधिक फायदा…
किसानों के खेतों में सरसों की फसल तो पकाव के पडाव है, लेकिन अब चने की फसल में फली में दाना बनना चालू हो गया है। वहीं गेहूं की फसलों में दाना दूधिया रहा है। चने की फसलों में खेतों में नमी कम होने से खेतों में चने के कई – कई पौधे सूखना शुरू हो गया था। लेकिन अब बूंदाबांदी व बरसात होने से चने में सूख नहीं आएगी और दाना अच्छी तरह से पकेगा। इसी प्रकार जिन किसानों के पास गेहूं में समय पर पानी नहीं लगा, उन खेतों में अब बरसात सोने पर सुहागा हो गई है।
इस बार सोना उगलेगी धरती….
पिछले कई वर्षों में इस बार बस्सी, चाकसू एवं जमवारामगढ़ उपखण्ड इलाकों में जिन किसानों के पास खेतों में सिंचाई के संशाधन है, उनके खेतों में तो अच्छी पैदावार है ही, लेकिन जिन किसानों के पास पानी के संशाधन नहीं है , उनके खेतों में भी इस बार चना व सरसों की फसल लहलहा रही है। पहले तो बुवाई के वक्त बरसात हो गई थी और बाद में जनवरी में तीन मावठ हो गई थी। अब यह मावठ होने से रही- सही कसर पूरी हो जाएगी।