यमन की जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टलने की खबर को चौबीस घंटे भी नहीं हुए थे कि अब उनकी मुश्किलें बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि निमिषा की फांसी को टालने के एकमात्र विकल्प ब्लड मनी को पीड़ित परिवार ने नामंजूर कर दिया है। यानी अब निमिषा की फांसी टलने पर एक बार फिर से पेंच फंस गया है। मारे गए यमनी नागरिक तलाल अबदो महदी के परिवार ने साफ कहा है कि उन्हें खून के बदले खून चाहिए, इससे कम कुछ भी नहीं..
पीड़ित के भाई अब्देलफतह महदी ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि परिवार ने ब्लड मनी समेत सुलह की सभी कोशिशों को ठुकरा दिया है.. ब्लड मनी को उनकी भाषा में दियात कहते हैं. अब्देल ने कहा कि इस समय जो कुछ भी हो रहा है, और मध्यस्थता या सुलह की जो भी कोशिशों हो रही हैं वो नई नहीं हैं और न ही आश्चर्यजनक हैं. पिछले कुछ वर्षों में मध्यस्थता के गुप्त और गंभीर प्रयास हुए. हमने दबाव का सामना किया लेकिन हम अड़े रहे. उन्होंने साफ कहा, ‘हमारी मांग स्पष्ट है- किसास यानी बदला और कुछ भी नहीं.’ उन्होंने आगे कहा कि फांसी अभी टाल दी गई है. हमें इसकी उम्मीद नहीं थी, खासकर इसे रुकवाने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि हम सुलह के किसी भी रूप या तरीके को ठुकरा देंगे. अब्देल ने ललकारते हुए लिखा है कि कोई भी प्रेशर हमें हिला नहीं पाएगा. खून का सौदा नहीं हो सकता. प्रतिशोध जरूर पूरा होगा.
आपको बता दें, यमन में 16 जुलाई यानी आज ही के दिन निमिषा को फांसी होने वाली थी लेकिन अचानक खबर आई कि फांसी टाल दी गई है. पलक्कड जिले की 38 साल की नर्स प्रिया को एक यमनी नागरिक की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा मिली है. यमन में भारत की राजनयिक मौजूदगी नहीं है क्योंकि वहां काफी समय से गृह युद्ध चल रहा है. केरल की स्थानीय मीडिया के मुताबिक भारतीय अधिकारी यमन के जेल प्रशासन के संपर्क में हैं, जो हूती विद्रोहियों के कंट्रोल में है.. भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टलने के बाद से ही देशवासी प्रार्थना कर रहे हैं कि वो सुरक्षित स्वदेश लौट आएं. बताया जा रहा है कि सऊदी अरब में अपने दूतावास के जरिए भारत सरकार यमन में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रही है.. मगर, पीड़ित परिवार के निमिषा की जिंदगी के अंतिम विकल्प ब्लड मनी को ठुकराना तमाम कोशिशों को बड़ा झटका दे रहा है।