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प्रधानमंत्री ओली ने दिया इस्तीफा, जानिए सुदान गुरुंग की कहानी…

36 वर्षीय सुदान गुरुंग एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो हामी नेपाल नामक युवा-नेतृत्व वाले NGO के अध्यक्ष हैं। अब यही NGO इस आंदोलन की असली ताकत बनकर उभरा है।

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Pankaj Meghwal

Sep 09, 2025

नेपाल इन दिनों बड़े आंदोलन की चपेट में है। यह आंदोलन देश के युवाओं द्वारा शुरू किया गया, जिसने देखते ही देखते पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया। वजह थी – 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगा बैन। इन प्लेटफॉर्म्स में Facebook, Instagram, WhatsApp, YouTube और X जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। हालांकि सरकार ने सोमवार रात को ये बैन हटा लिया, लेकिन तब तक आंदोलन रुकने के बजाए और ज्यादा उग्र हो गया। भीड़ ने संसद भवन, राष्ट्रपति और अन्य मंत्रियों के घरों के साथ-साथ प्रधानमंत्री के निजी निवास को भी आग के हवाले कर दिया।

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार शाम 6 बजे सभी पार्टियों की बैठक बुलाई, लेकिन जब उनके कई मंत्री सरकार के आंदोलन को संभालने में नाकामी पर इस्तीफा देने लगे, तो ओली ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में घुसपेठिए और अराजक तत्व घुस आए हैं, सोशल मीडिया पर बैन का मकसद सेंसरशिप नहीं, बल्कि “नियमों की निगरानी” था।

इस पूरे घटनाक्रम में एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है – सुदान गुरुंग। 36 वर्षीय सुदान गुरुंग एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो हामी नेपाल नामक युवा-नेतृत्व वाले NGO के अध्यक्ष हैं। अब यही NGO इस आंदोलन की असली ताकत बनकर उभरा है। सोशल मीडिया के ज़रिए इस संगठन ने रैलियों की जानकारी, सुरक्षा उपाय और जरूरी दिशा-निर्देश लोगों तक पहुंचाए। छात्रों से खास अपील की गई कि वे स्कूल यूनिफॉर्म में आएं और साथ में किताबें लेकर आएं, ताकि प्रदर्शन की छवि एक शांतिपूर्ण आंदोलन के रूप में बने। सुदान गुरुंग खुद को एक परोपकारी व्यक्ति बताते हैं। पिछले दस सालों से वह आपदाओं के समय राहत कार्य में जुटे रहे हैं – चाहे वो भूकंप हो, बाढ़ या भूस्खलन। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह फंडरेज़र के ज़रिए पैसे इकट्ठा करके ज़रूरतमंदों तक मदद पहुंचाते रहे हैं।

सुदान गुरुंग का जुड़ाव जनरेशन-Z से एक गहरी व्यक्तिगत कहानी से शुरू हुआ। बताया जाता है कि उन्होंने एक भूकंप के दौरान अपना बच्चा खो दिया था। यही घटना उनके जीवन का मोड़ बन गई। पहले एक साधारण कार्यकर्ता, और फिर एक मजबूत आयोजक के रूप में उन्होंने आपदा राहत में बड़ा योगदान दिया। इस आंदोलन के साथ एक डिजिटल कैंपेन Nepo Kid भी जुड़ गया, जिसमें नई पीढ़ी ने व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव की मांग उठाई। सोशल मीडिया के माध्यम से सुदान गुरुंग लगातार युवाओं से जुड़े रहे और उनकी आवाज़ बन गए।

जब सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन लगाया, तो यही एक छोटा सा विरोध प्रदर्शन विशाल जन आंदोलन में बदल गया। अब देखना होगा कि नेपाल की सरकार में किस तरह के बदलाव आते हैं? और सुदान गुरुंग की इसमें कितनी भुमिका होगी?