टैरिफ्स का सबसे ज़्यादा असर टेक्सटाइल्स, जेम्स एंड ज्वैलरी, कालीन, फर्नीचर और झींगा (shrimps) पर पड़ने वाला है। इसका सीधा मतलब है कि अब इन सामानों को अमेरिका में बेचना फायदे का सौदा नहीं रहेगा। तो क्या अब ये प्रोडक्ट्स भारत में सस्ते हो जाएंगे? सरल भाषा में देखें तो लगता है कि जब सामान अमेरिका नहीं जाएगा, तो भारत में ज़्यादा माल बचेगा और कीमतें गिरेंगी। लेकिन असली तस्वीर थोड़ी पेचीदा है। आइए इसको समझते हैं…
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो टैरिफ लगाया है, वो असल में एक तरह का टैक्स है जो विदेश से आने वाले माल पर लगता है। जब भारतीय सामान पर 50% टैक्स लगेगा, तो वहां के खरीदारों को यह महंगा मिलेगा। ऐसे में हो सकता है कि अमरीका… बांग्लादेश या पाकिस्तान जैसे देशों से सामान खरीदें, जिनपर टैरिफ कम है। इससे भारतीय निर्यातकों को घाटा होगा अब उनके पास एक ही रास्ता है कि वो वही सामान भारत में बेचें। लेकिन इसमें कई दिक्कतें हैं। अक्सर जो सामान अमेरिका या दूसरे देशों में एक्सपोर्ट होता है, वो भारत में बिकने वाले सामान से बेहतर क्वालिटी का होता है क्योंकि वो उन देशों के मानकों के हिसाब से बनता है। साथ ही, इन सामानों पर मुनाफा थोक में मिलता है — यानी एक साथ बहुत ज़्यादा माल बेचकर व्यापारी मुनाफा कमाते हैं वो भी डॉलर में होता है। अब अगर वही सामान भारत में बेचा जाए, तो उस पर वैसा मुनाफा नहीं मिलेगा और भारतीय बाज़ार की क्षमता इतनी नहीं है कि वो अचानक इतना सारा एक्स्ट्रा माल खरीद सके। इसलिए कंपनियों के लिए बेहतर होगा कि वो नए विदेशी बाज़ार जैसे यूरोप या खाड़ी देशों का रुख करें।
छोटे और बड़े व्यापारियों में फर्क की बात करें तो बड़े एक्सपोर्टर्स कुछ समय इंतज़ार कर सकते हैं — जब तक नया खरीदार ना मिले, तब तक माल रोक सकते हैं। लेकिन छोटे व्यापारी, जिनके पास कैश फ्लो की समस्या है — जैसे कर्मचारियों को सैलरी देनी है या कर्ज चुकाना है — वो शायद अपना माल भारत में ही बेचने पर मजबूर हो जाए। इसका मतलब है कि कुछ सामान जैसे कपड़े, जूते, चमड़े के उत्पाद वगैरह भारतीय बाज़ार में ज़रूर आएंगे, और शायद थोड़े सस्ते भी मिलें। लेकिन ये असर कितना बड़ा होगा, ये कहना अभी मुश्किल है।
यहां ये जान लेना भी जरूरी है, कि रोजगार पर कितना असर पड़ेगा ? बता दें कि भारत में एक्सपोर्ट इंडस्ट्री सस्ती है क्योंकि यहां की मज़दूरी सस्ती है। इसलिए अमेरिका जैसे देशों के लिए भारतीय सामान सस्ता पड़ता है। अब जब ऑर्डर कम हो जाएंगे, तो उत्पादन भी घटेगा और जब उत्पादन घटेगा, तो जाहिर है लोगों की नौकरियां भी जाएंगी। ये असर धीरे-धीरे बाजार पर पड़ेगा — क्योंकि नौकरी नहीं होगी, तो खर्च करने की ताकत भी कम होगी।
अब इस टैरिफ टेंशन को लेकर एक्सपोर्टर्स की संस्थाएं सरकार से सपोर्ट की मांग कर रही हैं — जैसे कि सस्ते लोन, टैक्स में छूट वगैरह। यहां सरकार व्यापारियों कि मदद कर भी दे लेकिन दिक्कत ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की पॉलिसीज़ अक्सर बदलती रहती हैं। इसलिए लॉन्ग-टर्म प्लान बनाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में देखना होगा कि भारत सरकार इस समस्या से कैसे निपटती है और भारत एक्सपोर्ट में क्या बदलाव आते हैं ?