
भिलाई.65 की उम्र की सांकरा निवासी ठगिया बाई, कुम्हारी की लेडग़ी बाई और शारदा पारा कैंप-2 की गीता नारों की गर्जना में स्वर में स्वर मिला रही थीं। आसमान की ओर रह-रहकर उठती उनकी भिंची हुई मुठ्ठी से साफ था कि प्रहार, प्रतिशोध, प्रतिज्ञा की ज्वाला २६ सालों से आज तक उनके दिलों में भभक रही है। इनके जैसे और भी कितने बूढ़े मां-बाप, पत्नी और बच्चे थे जो अपनी दुखद स्मृतियों के साथ 1 जुलाई 1992 को भिलाई गोलीकांड में मारे गए अपने बेटे, पति और पिता को श्रद्धांजलि देने पॉवर हाउस रेलवे स्टेशन पहुंचे थे।