कोराेना संक्रमण से उभरे लोगों को क्षय रोग से बचाने के मकसद से प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में क्षय मुक्त राजस्थान अभियान शुरू किया गया। अभियान 1 जुलाई डाॅक्टर दिवस तक चलेगा। सीएचओ (कम्न्यूनिटी हैल्थ ऑफिसर) को उनके स्वास्थ्य केेंद्र के अधीन क्षेत्र में एएनएम और अन्य संसाधनों की मदद से डोर टू डोर सर्वे करना होगा। इसमें विशेष रूप से उन पर फोकस रहेगा जो कोरोना ग्रसित हुए थे। सीएचओ को घर-घर सर्वे की संभावित टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। ग्रामीण स्तरों पर निक्षय ग्राम सभाएं की जाएगी।
सीएमएचओ डॉ. मुस्ताक खान ने बताया कि कोरोना संक्रमण में सबसे ज्यादा असर लंग्स (फेफडों) पर पड़ता है। जिनके फेफड़े कमजोर हैं उन्हें टीबी का खतरा सर्वाधिक रहता है। ऐसे में इन श्रेणी के लोगों पर विशेष फोकस रहेगा। इसके साथ ही जिन लोगों के पिछले 5 सालों के दौरान टीबी का संक्रमण रह चुका हो, मधूमेह, एड्स, कुपोषित या तंबाकू का सेवन करने वाले अन्य टीबी से संबंधित व्यक्ति पर विशेष नजर रहेगी। इसके साथ ही सीएचओ के अधीन आने वाली समूची जनसंख्या का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
बच्चों की अलग से रिपोर्ट
सर्वे के दौरान 5 साल से कम के बच्चों की अलग से रिपोर्टिंग की जाएगी। इसके तहत टीबी रोग से ग्रसित मरीज के सीधे संपर्क में आने वाले 5 साल से कम के बच्चों और 5 साल से अधिक के बच्चों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। किसी भी बच्चे में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो उनका उपचार शुरू किया जाएगा। जिला क्षय रोग अधिकारी प्रदीप कटारिया ने बताया कि सीएचओ को सर्वे कर रिपोर्टिंग करनी है।