भीलवाड़ा में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव शुक्रवार को भीलवाड़ा में मुख्य डाकघर के पास स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में उल्लास एवं उत्साह से भरे माहौल में महन्त बाबूगिरीजी महाराज के सान्निध्य में मनाया गया। भीलवाड़ा में जन्माष्टमी पर मुख्य आकर्षण संकटमोचन हनुमान मंदिर पर मनाया जाने वाला कृष्ण जन्मोत्सव ही रहता है। शाम होते ही भगवान कृष्ण के विभिन्न जीवन प्रसंगों से जुड़ी झांकियों के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
मंदिर के महन्त बाबूगिरी ने बताया कि जन्माष्टमी पर फूलों से एवं रंग-बिरंगी रोशनी से मंदिर पर आकर्षक सजावट करने के साथ हनुमानजी महाराज के डायमंड का चोला चढ़ाया गया। जन्माष्टमी पर 25 से अधिक विद्युतचलित झांकिया मुख्य आकर्षण का केन्द्र रही। इन झांकियों के दर्शन शाम 5 बजे बाद शुरू होते ही कृष्ण भक्तों की भीड़ लगने लगी। इन झांकियों के माध्यम से भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का चित्रण होने के साथ विभिन्न सामाजिक संदेश भी प्रदान गए। ये झांकिया आगरा, दिल्ली व मथुरा से आने वाले 30 से अधिक कलाकारों द्वारा तैयार की गई थी। मंदिर परिसर में भी विशेष सजावट की गई थी। झांकियों के माध्यम से भगवान कृष्ण के साथ भगवान राम के जीवन की झलक भी दिखाई गई थी। जिन झांकियों की प्रस्तुति दी गई उनमें भगवान कृष्ण का मध्यरात्रि में कारागृह में जन्म, रासलीला, नन्हें कृष्ण को पकड़ती यशोदा, नाग लीला, राम को बैर खिलाती शबरी, अशोक वाटिका, हनुमानजी राम-लखन को कंधे पर बिठाकर ले जाते हुए, हनुमानजी सीना फाड़ते हुए, राम,लखन व सीता वन को जाते हुए, सुरसा के मुख में हनुमानजी, कृष्ण को यमुना पार कराते वासुदेव आदि प्रसंगों का चित्रण झांकियों के माध्यम से किया गया था।
जन्माष्टमी पर गोलप्याउ चौराहे से नगर परिषद चौराहे तक आकर्षक रोशनी एवं सजावट की गई थी। शाम 5 बजे से झांकियों का दर्शन शुरू हो गया एवं बाल गोपाल भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मध्यरात्रि में मनाया गया। जयकारों के बीच भगवान को मिश्री मावा, पंच मेवा, फल आदि प्रसाद चढाने के साथ अभिषेक किया गया। महंत बाबूगिरीजी महाराज ने बताया कि भगवान कृष्ण को 501 किलो पंजेरी का भोग लगाने के साथ 11 किलों का मिल्क केक भी काटा गया। हाथीघोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की जयघोष वातावरण में गुंजायमान होता रहा।