video: शिक्षा विभाग का यह कैसा दोहरा रवैया, प्रदेश के 1 लाख 72 हजार शिक्षक होंगे प्रभावित
– शिक्षकों को लगाया प्रशिक्षण में तो कैसे बढ़ेगा नामांकन?
-नई शिक्षा नीति के तहत 7 अगस्त तक चलेंगे प्रशिक्षण
बूंदी. सरकार की दोहरी नीति सरकारी स्कूलों पर भारी पड़ रही है। जी हाँ। एक तरफ तो प्रवेशोत्सव मनाया जा रहा है,नामांकन बढ़ाने व ड्राप आउट बच्चों को जोडऩे की कवायद की जा रही है तो दूसरी ओर शिक्षकों को प्रशिक्षण में व्यस्त करके दोहरा रवैया अपना रही है। शिक्षा विभाग के दोहरे रवैये ने शिक्षकों की दुविधा बढ़ा दी है। प्रदेश के 1 लाख 72 हजार 494 शिक्षकों को प्रशिक्षण में उलझा दिया है।
ऐसे में लिहाजा शिक्षकों की मुसीबत तो बढ़ गई है, लेकिन शिक्षक संगठनों ने भी इसका विरोध शुरु कर दिया। खुद प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षक भी दबे मुंह इसका विरोध कर रहे है। जानकारी के अनुसार कोरोना काल के बाद गत वर्ष ही पूरे सत्र स्कूल चले है, जहां छात्र लर्निंग लॉस को पूरा भी नहीं कर पाए उसी के बीच इस वर्ष प्रवेशोत्सव शुरू होते ही राज्य सरकार ने शिक्षकों को प्रशिक्षण में व्यस्त करके पेशोपेश में डाल दिया है।
शिक्षक पहले ही कई गैर शैक्षणिक कार्यो में व्यस्त रहता है। जिसकी समय-समय पर संगठन मांग उठाते आ रहे है उसके बाद यह प्रशिक्षण के आदेश अध्यापकों ओर अभिभावकों के लिए चिंताजनक साबित हो रहा है। एक तरफ तो सरकार दस फीसदी नामांकन वृद्धि का लक्ष्य का आदेश जारी किया हुआ है। ऐसे में आखिर कैसे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा।
7 अगस्त तक चलेंगे प्रशिक्षण
नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षकों में क्षमता संवर्धन के लिए आयोजित होने वाले 6 दिवसीय प्रशिक्षण में कक्षा एक से पांच तक के शिक्षक प्रशिक्षण की शुरुआत प्रदेश स्तर पर एसआरजी प्रशिक्षण के साथ हो गई।
जिला स्तर पर एमटी व केआरपी का प्रशिक्षण 10 से 15 जुलाई तक चलेगा। 17 जुलाई से शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरु होगा,जो 7 अगस्त तक तीन चरणों में चलेगा। लीडरशिप आधारित प्रशिक्षण में उप्रावि प्रधानाध्यापकों तथा एसआरजी तथा एमटी/केआरपी का प्रशिक्षण भी जुलाई व अगस्त में प्रस्तावित है। उप प्राचार्य, एसआरजी, केआरपी प्रशिक्षण 2 से 14 तथा उपप्राचार्य प्रशिक्षण 17 से 22 जुलाई तक तथा पीईईओ व यूसीईईओ का प्रशिक्षण 24 जुलाई से 7 अगस्त के बीच होगा।