नैनवां. शहर में शुक्रवार को कहार समाज द्वारा निकाली दहेलवालजी महाराज की झण्डी की शोभायात्रा में लोक संस्कृति जीवंत हो उठी। अलगोजों, ढोलक व मजीरों की धुन पर तेजाजी गायन के साथ ग्रामीणों का लोक संस्कृति की छठा बिखराता नृत्य देखकर चलते कदम ठहरते रहे। कलाकार नन्दा व बलराम कच्ची घोड़ी नृत्य करते चल रहे तो केवट नगर के लोक कलाकार सोजीलाल अलगोजों, रामफूल ढोलक, रामकिशन मजीरों की की स्वर लहरियां बिखराते चल रहा तो राधाकृष्ण कहार, महावीर व शिवकरण तेजाजी गायन करते चल रहे थे।
महिलाओं के दल भी अलग ही नृत्य करते हुए चल रहे थे। तेजाजी के गीतों पर पुरुषों व महिलाओं में मची होड़ को देखने के लिए मार्ग में मकानों की छतें, चबूतरिया व दुकानों के बरामदे लोगों से अटे रहे। केवट नगर से रवाना हुई शोभायात्रा नवलसागर तालाब की पाल पर होकर गढचौक पहुंचते ही लोकसंस्कृति के नजारों के देखने लोग उमड़ पड़े। तेजाजी शोभायात्रा के आगे झण्डियां चल रही थी
दपोला पहुंचते ही टोडपोल से आई हुई दूसरी शोभायात्रा भी इसमे शामिल हो गई। दपोला में दोनों शोभायात्राएं एक साथ आगे बढी। यहां से शोभायात्रा गढपोल, कनकसागर तालाब की पाल पर होकर दहेेलवालजी के थानक पर पहुंची। जहां शाम 6 बजे झण्डियां चढाने की रस्म व दहेलवालजी की पूजा-अर्चना के बाद विसर्जित हुई।