छतरपुर. सावन-भादव में कम बारिश के बाद अब मानसून बारिश दो दिन से हो रही है। लेकिन अब तक मानसून की औसत बारिश से भी कम बारिश होने से जिले के बांधों में इस बार 50 फीसदी जलभराव भी नहीं हो पाया है। जिले की औसत बारिश 42.3 इंच की तुलना में जिले में इस बार अब तक केवल 25.6 इंच बारिश हुई है, जो पिछले साल हुई औसत बारिश 45.9 इंच से 20 इंच कम है। बांध नहीं भर पाने से सिंचाई और बोरबेल के जरिए पीने के पानी पर आश्रित लोगों को परेशानी का सामान करना पड़ सकता है। जिले में करीब 1 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई बांधों से की जाती है।
नहीं भर पाए छोटी नदियों के बांध
जिले में मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के बांधों की श्रंखला है। जिसमें मध्यप्रदेश को पानी देने वाले बांध छोटी-छोटी नदियों पर बनाए गए हैं। जिनमें इस बार जलभराव कम हुआ है। खूरार नदी पर बने बेनीगंज बांध में इस बार 33 फीसदी जलभराव हो पाया है। वहीं लोकल नाला पर बने बूढ़ा बांध में केवल 7 फीसदी जलभराव है। जबकि छतरपुर शहर के लिए बूढ़ा बांध से पानी सप्लाई होता है। ऐसे में कम जलभराव पानी सप्लाई को प्रभावित करेगा। इसी तरह लोकल नाला पर बने गोरा टैंक में केवल १६ फीसदी जलभराव हुआ है जबकि कुटनी नदी बने कुटनी डैम में मात्र १४ फीसदी ही पानी भर पाया है। बन्ने नदी पर बने रनगुंवा बांध में इस बार १७ फीसदी जलभराव दर्ज हुआ है। वहीं, उर्मिल नदी पर बने सिंहपुर बांध में ४५ फीसदी जलभराव हुआ है। जबकि उर्मिल नदी पर बने उर्मिल डैम केवल 20 प्रतिशत पानी है।

औसत बारिश भी नहीं हो पाई पूरी
भू-अभिलेख विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में १० सितंबर की सुबह तक कुल २५.६ इंच बारिश दर्ज हुई है, जो जिले के औसत 42.3 इंच से १६.७ इंच कम है। हालांकि पिछले साल इस अवधि में 31 इंच बारिश हुई थी, लेकिन सितंबर में बारिश के चलते औसत 45 इंच हो गया था। लेकिन इस बार मानसून चिंता में डाल रहा है। जिले के गौरिहार अंचल में इस बार अबतक केवल 22.4 इंच बारिश हुई है। नौगांव में 25.9, राजनगर में 25.6 इंच और लवकुशनगर में 25.4 इंच ही बारिश हुई है। केवल बड़ामलहरा में सबसे अच्छी बारिश 30.7 इंच दर्ज हुई है। वही, बकस्वाहा में २७०५ इंच और छतरपुर में 23.8इंच बारिश ही दर्ज हुई है।
पिछले साल हुई थी सबसे अच्छी बारिश
पिछले साल जिले में औसत से भी अधिक बारिश दर्ज की गई। नतीजा ये रहा कि वर्ष 1957 में मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के संयुक्त प्रयास से बना छतरपुर जिले का रनगुंवा बांध 2009 के बाद पहली बार 57 फीसदी तक भर गया है। इसके साथ ही जिले के अन्य बाधों में जलभराव भी पहले से बेहतर हुआ है। रनगुंवा बांध में पिछले साल 57 फीसदी जलभराव होने से मध्यप्रदेश के हिस्से में मिलने वाले 30 फीसदी पानी और उत्तरप्रदेश के हिस्से में मिलने वाले 70 फीसदी पानी से किसानों को साल में तीन बार सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।
पिछले साल से भी कम हो पाएगी इस बार सिंचाई
बांधों के जलभराव की स्थिति इतनी खराब है कि सिंचाई विभाग इस बार केवल कम पानी वाली फसलों के लिए एक बार ही पानी दे पाएगा। केवल 49250 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए ही पानी देने का लक्ष्य है। जबकि पिछले साल 60 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए पानी दिया गया था। जिले के बांधों से 92 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए जलभराव क्षमता है, लेकिन हर साल घट रही औसत बारिश के चलते सिंचाई का रकबा घटता जा रहा है।

फैक्ट फाइल
जलभराव प्रतिशत में
बांध 2020 2021 2022 2023
बेनीगंज 49 33 46 33
बूढ़ा 46 13 31 07
गोरा तालाब 07 07 08 16
कुटनी 80 42 22 14
रनगुंवा 37 15 57 17
सिंहपुर 89 24 52 45
तारपेड़ 92 49 24 40
उर्मिल 16 12 18 20
फैक्ट फाइल सिंचाई
वर्ष सिंचित की गई भूमि
2016-17 85691 हेक्टेयर
2017-18 33401 हेक्टेयर
2018-19 80335 हेक्टेयर
2019-20 91161 हेक्टेयर
2020-21- 60000 हेक्टेयर
2021-22 49250 हेक्टेयर
2022-23- 62000 हेक्टेयर
