छतरपुर. वर्तमान समय मे गोवंश सबसे बुरी दशा से होकर गुजर रहा है। भूख के कारण कही भी गायें पॉलीथिन खाती देखी जा सकती हैं या किसी चौराहे, रास्ते पर सड़क दुर्घटना में मौत का शिकार हो रही हैं। गायें झुंड के रूप में शहर के सभी चौराहे व मुख्य मार्गो पर देखी जा सकती है। वहीं गांवों से भगाया हुआ गोवंश अब हाइवे को अपना ठिकाना बनाए हुए है। लेकिन इस ओर मात्र बातें ही की जा रही हैं इनके संरक्षण के लिए जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जानकारी के अनुसार गाय की जरुरत समाज को जब तक थी जब गाय ने अपना सब कुछ समाज को दिया। जिसमें गाय ने दूध, दही, मख्खन, घी के अलावा गोबर दिया, जिससे खेती के लिए जैविक खाद मिला, इतना ही नहीं गाय ने बछड़ा दिया, उससे ही खेती की जा सकी थी, बैल के बिना खेती संभव नहीं थी। अब गाय के साथ गोवंश को सहारे की जरुरत है। तब समाज उसे सड़क पर छोड़ रहा है। जब समाज को जरुरत थी तब उसकी पूजन की। उसमें देवी देवताओं का वास माना गया। अब उसी गाय का तिरस्कार किया जा रहा है। जिसके बाद अब समाज और सरकार दोनों की ओर से गाय की उपेक्षा की जा रही है, तभी तो गाय की हालत ये हो गई कि उसे सड़क पर आना पड़ा। बड़ी संख्या में गाय सड़क पर रहने के कारण उसे दुर्घटना का शिकार होना पड़ रहा है। जो गाय के कारण घायल हो रहे हैं उसमें गाय की गलती कम और समाज और सरकार की गलती अधिक है।
खंडहरों व नालों में गिरकर घायल हो रहे गोवंश
शहर के सभी इलाकों में कई घर ऐसे में हैं जो पुराने होने से अब खंडहर हो चुके हैं या फिर अधबने हैं। यहां पर इनके मालिकों ने बिना दरवाजे के छोड़ दिया। ऐसे में बारिश के दौरान पानी से बचाव के लिए गोवंश ऐसे मकानों में घुस जाते हैं और फिर यहां पर मौजूद टैंक में गिर जाते हैं। वहीं आम लोगों की नजर नहीं पडऩे से वह दम तोड़ देते हैं। वहीं अगर किसी ने देख लिया, तो घायल अवस्था में उसे निकाला जाता है। वहीं आए दिन शहर के नालों में गोवंश गिर जाते हैं।
सड़क दुर्घनाग्रस्त होकर मर रहे मवेशी
शहर की घनी आबादी के बीच से निकलने वाला व्यस्ततम रास्ता दोनों हाइवे होने से आने जाने वाले राहगीरों के साथ ही वाहन चालकों को भी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही फोरलेन हाइवे में भी गोवंश होने से आए दिन दुर्घटनाओं में ये घायल हो रहे हैं।
इसलिए ऐसी स्थिति बनी
वर्षा के दिनों में जब खेतों में फसल बढऩे लगती है तो इन गायों से फसल को नुकसान न हो इसलिए गायों को खेतों से खदेड़ कर अपने गांव से बाहर कर दिया जाता है और पशुपालकों द्वारा गायों को चारे के लिए भगवान भरोसे छोड़ देते हैं। जगह-जगह भटकती गाय अंतत शहरों में आ पहुंचती हैं।
सड़क पर घूमती गायें रोज हो रही दुर्घटना का शिकार
लावारिस घूम रहे गोवंश और इनसे हो रही दुर्घटना को लेकर पिछले दिनों कलक्टर ने सभी जनपद पंचायत के सीइओ और नगर निकायों के सीएमओ को सख्त निर्देश दिए थे कि गोवंश के लिए ऐसी व्यवस्था की जाए कि सड़कों पर गोवंश न रहे। इसके बाद नगरीय निकाय द्वारा कुछ कर्मचारियों को सड़क पर गायें न बैठे इस के लिए लगाया गया था। फिर भी कई मार्गो ओर गायें बसों व वाहनों की चपेट में आती हैं।