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छतरपुर मेडिकल कॉलेज के टेंडर की तारीख 30 जून तक बढ़ी, दो साल में होगा कैंपस निर्माण
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छतरपुर मेडिकल कॉलेज के टेंडर की तारीख 30 जून तक बढ़ी, दो साल में होगा कैंपस निर्माण

अनुभवी कंपनी ही बनाएगी छतरपुर का मेडिकल कॉलेज, नए टेंडर में शामिल हो सकती है पुरानी ठेका कंपनी भी

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छतरपुर. मेडिकल कॉलेज निर्माण के टेंडर की अंतिम तारीख 19 जून से संशोधित कर 30 जून की गई है। नए टेंडर के मुताबिक मेडिकल कॉलेज कैंपस निर्माण की अनुभवी कंपनी ही छतरपुर का मेडिकल कॉलेज बनाएगी। इधर, पुरानी ठेका कंपनी ने पुराने ठेका को लेकर कोई दावा-आपत्ति नहीं की है, बल्कि नए टेंडर में पुरानी कंपनी भी भाग लेगी। पुरानी दरों पर काम करने से मना कर चुकी कंपनी समेत देश की अनुभवी कंपनियों को ही टेंडर में शामिल किया जा रहा है।

अब 247 करोड़ की लागत से बनेगा
मेडकिल कॉलेज निर्माण के लिए दोबारा जारी टेंडर में संशोधन के साथ 30 जून तक निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। दो साल में भवन निर्माण को पूरा किया जाएगा। जिसके लिए मुख्य अभियंता कार्यालय लोक निर्माण विभाग ग्वालियर ने निविदा जारी की है।राज्य सरकार ने 12 जिलों में शुरु होने वाले नए मेडिकल कालेजों को बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग की पीआइयू शाखा को तीन सौ से चार सौ करोड़ रूपए पूर्व में ट्रांसफर कर दिए थे जिसमें छतरपुर मेडिकल कॉलेज के लिए 216 करोड़ रुपए का बजट दिया गया था। जिसे निर्माण सामग्री की दरें बढऩे के कारण अब 247 करोड़ का किया गया है। छतरपुर मेडिकल कालेज राज्य सरकार अपने बजट से बना रही है।


2025 से एडमिशन के लिए डीन की नियुक्ति जरूरी
लेटलतीफी के चलते मेडिकल कालेज कैंपस अब 2024 के बजाए वर्ष 2025 तक बनकर तैयार हो पाएंगे और 2025 में ही एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए प्रवेश भी शुरू हो जाएंगे। इसके पहले इन कालेजों के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिससे एमसीआई इन्हें संचालित करने के लिए अनुमति दे सके। मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए 1200 कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरी है। इसमें 155 टीचिंग स्टाफ रहना चाहिए। इनमें लैक्चरर और प्रोफेसर शामिल हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ, क्लेरिकल और चतुर्थ श्रेणी स्टाफ भी रहेगा। हालांकि डीन की नियुक्ति का इंतजार है। शुरुआत में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन को ही चार्ज दिया गया था। बाद में वापस ले लिया गया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक डीन की नियुक्ति का मामला लंबित है।

दिसंबर 2022 में अटक गया था मामला
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में सीएम शिवराज सिंह चौहान मेडिकल कालेज भवन निर्माण के लिए शिलान्यास कर चुके हैं। तब से अब तक तमाम अड़ंगे आ जाने से अभी भी छतरपुर मेडिकल कॉलेज का सपना साकार नहीं हो सका है। अगस्त 2018 में मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन के बाद रुक-रुक कर चल रही निर्माण की कवायद आखरी बार दिसंबर 2022 में ठप हो गई थी। मेडिकल कॉलेज का टेंडर लेने वाली कंपनी जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर ने 2 साल की देरी के चलते निर्माण सामग्री के दाम बढऩे से पुरानी दरों पर काम करने में असमर्थता जताई और साइट ऑफिस से पहले अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाया, फिर निर्माण सामग्री भी समेट ली।

3 साल तक चला मेडिकल कॉलेज के लिए आंदोलन
छतरपुर समेत आसपास के जिले के लोगों के लिए मेडिकल हब बन चुके छतरपुर में मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर जनता ने दो चरणों में बड़े आंदोलन किए। आंदोलन में सभी राजनीतिक दलों के नेता, समाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक, व्यापारी, नौकरी पेशा समेत सभी वर्ग के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन किए गए, धरने पर बैठे, मानव श्रंखला बनाई गई, कैंडल मार्च निकाला गया, हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यहां तक कि शहर बंद रखा गया। पहले चरण की तरह ही दूसरे चरण में भी इसी तरह से आंदोलन किया गया। वर्ष 2015 से 2018 तक लगभग सौ से ज्यादा प्रदर्शन आम जनता के द्वारा किए गए थे। जिसके बाद 15 अगस्त 2018 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह लाल परेड ग्राउंड भोपाल में छतरपुर मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की। 30 सितंबर को चुनाव के पहले तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने छतरपुर मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास भी किया। इसके बाद शिवराज सरकार कैबिनेट ने 4 अक्टूबर 2018 को 300 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति भी दी।


फैक्ट फाइल
पुरानी लागत- 216 करोड़ रुपए
लागत- 247.12 करोड़ रुपए
भवन- 13
कैंपस- 35 एकड़
पहले साल प्रवेश- 100 सीट
टीचिंग स्टाफ- 155
कर्मचारी- 1200

इनका कहना है
मेडिकल कॉलेज निर्माण के टेंडर की तारीख संशोधित करके 30 जून की गई है। कहीं कोई अडंगा नहीं है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही प्राथमिकता पर निर्माण कार्य शुरु कराया जाएगा।
केएस परस्ते, इइ, पीआइयू